15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में पटाखों से हुई आंख की चोटों का निःशुल्क इलाज 15 से 24 अक्तूबर तक
मनीष गुप्ता
कानपुर,
दीपों के इस पर्व पर जब पूरा देश खुशियों की रौशनी में नहाया हुआ है, वहीं एएसजी आई हॉस्पिटल ने समाज के सबसे नाजुक वर्ग—बच्चों की आंखों की सुरक्षा—को केंद्र में रखते हुए एक सराहनीय पहल की शुरुआत की है। अस्पताल ने घोषणा की है कि 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पटाखों से जुड़ी आंख की चोटों पर निःशुल्क परामर्श और आवश्यक सर्जरी की सुविधा दी जाएगी। यह सेवा 15 से 24 अक्तूबर 2025 तक एएसजी आई हॉस्पिटल के सभी केंद्रों पर उपलब्ध रहेगी।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि मरीजों को केवल फार्मेसी, एनेस्थीसिया और ऑप्टिकल सेवाओं के लिए मामूली शुल्क देना होगा। अस्पताल का यह कदम दिवाली के दौरान बढ़ती आंख की चोटों को रोकने और समाज में सुरक्षित उत्सव की भावना को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हर वर्ष देशभर में पटाखों से आंखों की चोट के दो हजार से अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं, जिनमें लगभग 60 प्रतिशत पीड़ित बच्चे होते हैं। इनमें से करीब 10 प्रतिशत मामलों में स्थायी दृष्टि हानि देखी गई है।
एएसजी आई हॉस्पिटल के वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञों ने कहा कि दिवाली की खुशियाँ तब ही संपूर्ण होंगी जब सुरक्षा के साथ मनाई जाएं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि पटाखे जलाते समय सुरक्षात्मक चश्मा पहनें, बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें, और भीड़भाड़ या ज्वलनशील वस्तुओं के पास पटाखे जलाने से बचें।
सुरक्षा के लिए एएसजी विशेषज्ञों की सलाह :
पटाखों को संभालते या उनके पास रहते समय सुरक्षात्मक गॉगल्स पहनें।
बच्चों को हमेशा बड़ों की देखरेख में ही पटाखे जलाने दें।
जले या अधजले पटाखों के पास कभी झुकें या दोबारा आग लगाने की कोशिश न करें।
पटाखे चलाने के बाद हाथ धोएं ताकि कोई रासायनिक पदार्थ आंखों में न जाए।
किसी भी चोट की स्थिति में आंख को रगड़ें या दबाएं नहीं, तुरंत नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें।
एएसजी आई हॉस्पिटल ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस दिवाली सुरक्षा को प्राथमिकता दें और बच्चों की आंखों की रक्षा करें।
तत्काल सहायता या जानकारी के लिए अस्पताल की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-1211-804 पर संपर्क किया जा सकता है।