कानपुर सेंट्रल से लेकर गुरसहायगंज तक मिले सुराग, लेकिन रेलबाजार पुलिस कर रही सिर्फ खानापूरी
कानपुर। रेलबाजार थाना क्षेत्र के फेथफुलगंज की रहने वाली शकुन्तला वर्मा की 18 वर्षीय बेटी महक वर्मा 27 अगस्त की दोपहर रहस्यमय हालात में लापता हो गई। मां का आरोप है कि बेटी को एक अज्ञात लड़की बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गई।
थाने में दी सूचना, संदिग्ध की फोटो तक नहीं ली गई
प्रार्थिनी शकुन्तला वर्मा ने अपनी पुत्री महक के गायब होने की सूचना तुरंत रेलबाजार थाने में दी, लेकिन पुलिस से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
कानपुर सेंट्रल में कैद दिखी लड़की, लेकिन बेटी की तस्वीर नहीं मिली
पीड़िता मां का दावा है कि पुलिस ने पहले उन्हें दिखाया कि “तुम्हारी बेटी इस लड़की के साथ गई है।” लेकिन सच में उनकी बेटी की तस्वीर कानपुर सेंट्रल में नहीं दिखाई दी। उस कमरे में केवल वह लड़की दिखी थी जिसे महक के साथ देखा गया, और उसके साथ एक अज्ञात महिला भी मौजूद थी। मां ने आगे की सीसीटीवी फुटेज की मांग की ताकि संदिग्ध महिला और उस लड़की की पहचान हो सके, लेकिन पुलिस ने साफ इनकार कर दिया।
उल्टा पुलिस परिजन से कहती रही—“तुम जहां कहोगे, हम वहीं चलेंगे तुम्हारी बेटी को ढूंढने।” इस पर मां ने सवाल किया—“अगर हमें ही पता होता बेटी कहां है, तो हम पुलिस की मदद क्यों लेते? हम खुद ही जाकर बेटी को ले आते।”
गुरसहायगंज में भी मिले सुराग, फिर भी पुलिस ने टाल दिया मामला
मां का कहना है कि गुरसहायगंज में उनकी भांजी ने महक वर्मा को देखा। इतना ही नहीं, बस के ड्राइवर ने भी लड़की को पहचान लिया। जब यह जानकारी रेलबाजार पुलिस को दी गई, तो उन्होंने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और मामला टाल दिया।
बुजुर्ग पिता और परिजनों की आंखों में आंसू
रोते-रोते मां, बुआ और बुजुर्ग पिता ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहा—“हमारी बेटी महक वर्मा को ढूंढने की जगह पुलिस हमें ही दोषी ठहरा रही है। हम दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन रेलबाजार पुलिस सिर्फ खानापूरी में जुटी है।”
सवालों के घेरे में रेलबाजार पुलिस
कानपुर सेंट्रल और गुरसहायगंज से मिले पुख्ता सुरागों के बावजूद पुलिस का ढुलमुल रवैया सवाल खड़े कर रहा है। अब यह चिंता बढ़ गई है कि क्या पुलिस अपनी ड्यूटी निभाने में गंभीर है या मासूम की जिंदगी से खिलवाड़ कर रही है।
परिजनों ने अब मुख्यमंत्री, पुलिस कमिश्नर और डीसीपी क्राइम से गुहार लगाई है कि उनकी बेटी को सुरक्षित घर लाया जाए। मोहल्ले में भी आक्रोश है और लोग कह रहे हैं—“अगर पुलिस शुरू से गंभीर होती, तो अब तक मासूम अपनी मां के पास होती।”