दोस्त संग मिलकर गला घोंटा, शव 75 KM दूर औरैया ले जाकर जलाया; छह महीने बाद राज खुला
कानपुर। फिल्मी स्टाइल में रची गई खौफनाक साजिश ने कानपुर को दहला दिया। यहां शराब का आदी एक बेटे ने अपने पिता की हत्या कर दी। उसने अपराध की योजना बनाने के लिए “दृश्यम” फिल्म और “क्राइम पेट्रोल” के एपिसोड तक देखे। पिता को मौत के घाट उतारने के बाद शव दोस्त संग मिलकर औरैया ले गया, पेट्रोल डालकर आग लगा दी। घटना मार्च में हुई थी, लेकिन पुलिस के रिकॉर्ड में मामला छह महीने बाद खुला।
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करोड़ों की संपत्ति और पैसों पर था विवाद
कल्याणपुर पुराना शिवली रोड, चंदेल नगर निवासी कमलापति (62) रेलवे में गार्ड थे और जयनगर (बिहार) से रिटायर हुए थे। उनके पास करोड़ों की आठ दुकानें थीं, जिनसे हर महीने 25 से 30 हजार रुपये किराया आता था। साथ ही 60 हजार रुपये पेंशन भी मिलती थी। बेटा रामजी शराब का लती था और पिता से पैसों की मांग करता रहता था। कमलापति पैसे देने से इंकार करते थे, इसी खुन्नस ने बेटे को खून करने पर मजबूर कर दिया।
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पत्नी के वृंदावन जाते ही दी वारदात को अंजाम
मार्च महीने में पत्नी मधु तिवारी वृंदावन चली गईं। इसी मौके का फायदा उठाते हुए रामजी ने अपने दोस्त ऋषभ शुक्ला (निवासी माधवपुर आईआईटी सोसाइटी) के साथ 17 मार्च को योजना बनाई। पिता नशे की हालत में मिले तो दोनों ने मिलकर उनका गला घोंट दिया।
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शव को औरैया ले जाकर पेट्रोल से जलाया
हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए दोनों ने कार से 75 किलोमीटर दूर औरैया, बेला के पटना नहर किनारे ले जाकर फेंका। पहचान मिटाने के लिए पेट्रोल डालकर चेहरा जलाने की कोशिश की। लेकिन चेहरा पूरी तरह से नहीं जल पाया। 18 मार्च को औरैया पुलिस को शव मिला, मगर उसकी पहचान नहीं हो सकी।
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ढाई माह बाद दर्ज हुई गुमशुदगी
पत्नी मधु तिवारी करीब ढाई महीने बाद 29 मई को लौटीं। पति घर पर नहीं मिले तो उन्होंने खोजबीन की। 12 जून को कल्याणपुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। औरैया पुलिस ने जो लावारिस शव बरामद किया था, उसकी फोटो दिखाई गई तो पहचान कमलापति के रूप में हुई।
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मोबाइल से खुला राज
रामजी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए पिता का मोबाइल अपने दोस्त के जरिए बिहार के जयनगर भिजवा दिया और कहा— वहां जाकर मोबाइल ऑन-ऑफ करना ताकि लोकेशन बिहार की निकले। ऋषभ ने मोबाइल ऑन तो किया, लेकिन बाद में नेपाल में बेचने के लालच में उसे वापस लेकर आया और रामजी को दे दिया।
जब पुलिस ने पूछताछ की और मोबाइल रामजी के पास मिला तो उसकी पूरी पोल खुल गई। सख्ती से पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
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बेरोजगारी और लालच बनी वजह
डीसीपी वेस्ट दिनेश चंद्र त्रिपाठी ने बताया—
“रामजी बेरोजगार था। पिता दुकानों का किराया और पेंशन का पैसा उसे नहीं देते थे। कई बार समझाने के बावजूद जब पिता नहीं माने तो उसने दृश्यम मूवी और क्राइम पेट्रोल देखकर हत्या की साजिश रची।”
पुलिस ने दोनों आरोपियों रामजी और ऋषभ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।