कानपुर,
भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (ICSI) कानपुर चैप्टर की ओर से आज होटल द प्रिसटीन में “कॉरपोरेट गवर्नेंस इन ट्रांजिशन: ऑपर्च्युनिटीज फॉर कंपनी सेक्रेट्रीज इन एनसीएलटी एंड ईएसजी” विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया। इस अवसर पर कानपुर के वरिष्ठ प्रशासनिक और कॉरपोरेट जगत के विशिष्ट अतिथि शामिल हुए।
मुख्य अतिथि और अतिथियों की मौजूदगी
सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में आलोक कुमार सिंह, परियोजना निदेशक, जिला ग्रामीण विकास एजेंसी, कानपुर मौजूद रहे, जबकि गेस्ट ऑफ ऑनर श्री प्रिंस कुमार, असिस्टेंट आरओसी, कानपुर (उत्तर प्रदेश) थे।
मुख्य वक्ताओं के रूप में सीएस सुरेश पांडे, काउंसिल मेंबर, आईसीएसआई और सीएस जतिन सिंगल, रीजनल काउंसिल मेंबर, आईसीएसआई ने अपने विचार रखे।
स्वागत और परिचय
इस अवसर पर सीएस आशीष बंसल, वाइस चेयरमैन, आईसीएसआई कानपुर चैप्टर ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और सेमिनार की थीम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संक्रमणकालीन कॉर्पोरेट प्रशासन का आशय है, कॉर्पोरेट ढांचों को बदलती अर्थव्यवस्था, नई तकनीकों और नियामक चुनौतियों के अनुरूप ढालना। उन्होंने पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी नेतृत्व पर बल दिया।
सचिव की भूमिका और अवसर
सीएस ईशा कपूर, सचिव, आईसीएसआई कानपुर चैप्टर ने कहा कि कंपनी सचिवों (सीएस) के लिए एनसीएलटी और ईएसजी में अपार अवसर हैं।
एनसीएलटी में वे कंपनियों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, कानूनी फाइलिंग कर सकते हैं और कंपनी के हितों की रक्षा कर सकते हैं।
ईएसजी में वे बोर्ड को सलाह देने, जोखिम प्रबंधन करने और निवेशकों का विश्वास बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि एक सशक्त ईएसजी प्रदर्शन कंपनी की साख बढ़ाने और एनसीएलटी कार्यवाहियों में सकारात्मक प्रभाव डालने में सहायक होता है।
विशिष्ट अतिथियों के विचार
मुख्य अतिथि आलोक कुमार सिंह ने कहा कि कंपनी सचिव कॉर्पोरेट कानून, प्रशासन और नैतिक मूल्यों का गहन ज्ञान रखने वाले ऐसे विशेषज्ञ हैं जो निदेशक मंडल, शेयरधारकों और सरकारी निकायों के बीच कड़ी का काम करते हैं। वे न केवल अनुपालन सुनिश्चित करते हैं, बल्कि कंपनी के लिए रणनीतिक नेतृत्व भी प्रदान करते हैं।
गेस्ट ऑफ ऑनर प्रिंस कुमार ने कहा कि संक्रमण काल में कंपनी सचिव बोर्ड और प्रबंधन के बीच सेतु का कार्य करते हैं। वे नए नियामक मानकों और प्रकटीकरण आवश्यकताओं का पालन सुनिश्चित करते हुए पारदर्शिता बनाए रखने में मदद करते हैं।
मुख्य वक्ताओं के विचार
सीएस सुरेश पांडे ने कहा कि कंपनी सचिवों के पास एनसीएलटी और एनसीएलएटी के समक्ष विलय, पुनर्गठन, दिवालियापन और समापन जैसे मामलों में अपार अवसर हैं। पर्याप्त अनुभव के साथ वे भविष्य में एनसीएलटी के तकनीकी सदस्य भी बन सकते हैं।
सीएस जतिन सिंगल ने कहा कि ईएसजी क्षेत्र में कंपनी सचिवों के पास रणनीतिक सलाहकार बनने, कॉर्पोरेट रणनीति में ईएसजी एकीकरण करने और दीर्घकालिक मूल्य सृजन की दिशा में कंपनियों को आगे ले जाने की अहम भूमिका है।
प्रबंधन और संचालन
कार्यक्रम में प्रबंध समिति से सीएस वैभव अग्निहोत्री, सीएस जाग्रति मिश्रा, सीएस रीना जाखोडिया और अन्य सदस्य सीएस मनोज यादव, सीएस मनीष शुक्ला, सीएस राहुल मिश्रा आदि मौजूद रहे।
सेमिनार का संचालन सीएस जाग्रति मिश्रा और सीएस ईशा कपूर ने प्रभावशाली ढंग से किया।