मनीष गुप्ता
कानपुर की धरती ने हमेशा ऐसे व्यक्तित्व दिए हैं जिन्होंने न केवल उद्योग जगत में बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण में भी अपनी गहरी छाप छोड़ी है। उन्हीं में से एक हैं वरिष्ठ उद्योगपति एवं समाजसेवी सेठ मुरारी लाल अग्रवाल। व्यापार में सफलता हासिल करने के साथ-साथ वे समाजसेवा और मानव कल्याण को भी उतना ही महत्व देते हैं। यही कारण है कि लोग उन्हें एक सच्चा समाजसेवक और प्रेरणास्रोत मानते हैं।
देशभक्ति की मिसाल
हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर उनका उत्साह देखने लायक होता है। 79वें स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने अपने निवास पर तिरंगा फहराकर दिन की शुरुआत की। राष्ट्रगान की गूंज और मिष्ठान वितरण से वातावरण देशभक्ति से सराबोर हो उठा। इसके बाद वे शहर के विभिन्न ध्वजारोहण कार्यक्रमों में शामिल हुए और हर जगह यही संदेश दिया कि “तिरंगे का सम्मान ही देश का मान है।”
एम.एल.ए. ग्रुप ऑफ कंपनी में कर्मचारियों और प्रबंधन संग उन्होंने झंडारोहण कर सबको शुभकामनाएं दीं। उनका कहना है कि आज़ादी केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि जीवनभर निभाने की जिम्मेदारी है।
समाजसेवा में सक्रिय योगदान
सेठ मुरारी लाल अग्रवाल सिर्फ एक उद्योगपति नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के लिए सहारा भी हैं। वे अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करते हैं—
गरीब बच्चों की शिक्षा हेतु फीस व किताबों की व्यवस्था।
निर्धन परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग।
अस्पतालों में दवाइयों और इलाज के लिए आर्थिक मदद।
आपदा और विपत्ति के समय राहत कार्यों में योगदान।
उनकी सोच यह है कि “समाज का सच्चा विकास तभी संभव है जब हम सब मिलकर दूसरों के जीवन में रोशनी और खुशियां ला सकें।”
प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व
उद्योगपति होते हुए भी उनका जीवन सादगी और सेवा की राह पर चलता है। वे अक्सर कहते हैं कि सेवा का असली अर्थ केवल दान देना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में बदलाव लाना है। उनका मानना है कि समाज को लौटाना ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
निष्कर्ष
सेठ मुरारी लाल अग्रवाल आज उन चुनिंदा व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं जो उद्योग, समाज और राष्ट्र—तीनों के लिए समर्पित हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि एक सच्चा समाजसेवक वही है जो निस्वार्थ भाव से कार्य करे और दूसरों के लिए प्रेरणा बने।