कानपुर। न्यू शिवली रोड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कल्याणपुर में पिछले दो दिनों से रैबीज वैक्सीन का स्टॉक समाप्त होने से मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुत्ते और अन्य जानवरों के काटने के बाद वैक्सीन लगवाने पहुंचे लोगों को बिना टीकाकरण के ही वापस लौटना पड़ रहा है, जिससे आम जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है।रैबीज एक अत्यंत घातक और जानलेवा बीमारी मानी जाती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार किसी संक्रमित जानवर के काटने के बाद समय पर एंटी-रैबीज वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी होता है। थोड़ी सी लापरवाही या देरी भी मरीज के जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। ऐसे में सीएचसी स्तर पर वैक्सीन का उपलब्ध न होना स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में लोग वैक्सीन लगवाने के लिए सीएचसी कल्याणपुर पहुंचे, लेकिन वहां रैबीज वैक्सीन उपलब्ध न होने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त या कम खर्च पर मिलने वाली सुविधा बंद होने से उन्हें निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों का रुख करना पड़ रहा है, जहां वैक्सीन का खर्च कई गुना अधिक है।इस संबंध में सीएचसी कल्याणपुर के चिकित्सक डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि रैबीज वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर व्यापक स्तर पर समस्या बनी हुई है। उन्होंने कहा कि केवल कानपुर ही नहीं बल्कि प्रदेश के कई जिलों में वैक्सीन की कमी की स्थिति है। वैक्सीन की आपूर्ति लखनऊ से होती है और फिलहाल वहां से नई खेप प्राप्त नहीं हुई है। जैसे ही वैक्सीन उपलब्ध होगी, टीकाकरण की व्यवस्था सामान्य कर दी जाएगी।वहीं स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि गर्मी और बरसात के मौसम में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में रैबीज वैक्सीन का स्टॉक खत्म होना विभाग की तैयारी और प्रबंधन की पोल खोलता है। लोगों ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग तत्काल वैक्सीन की उपलब्धता सुनिश्चित करे ताकि मरीजों को समय पर उपचार मिल सके और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। फिलहाल मरीजों और उनके परिजनों की नजरें स्वास्थ्य विभाग की ओर टिकी हैं कि आखिर रैबीज वैक्सीन का संकट कब खत्म होगा और सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण सेवा दोबारा सुचारु रूप से शुरू हो सकेगी।
रैबीज वैक्सीन संकट: सीएचसी कल्याणपुर से मरीज लौटे, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल