पॉलीहाउस और ड्रिप सिंचाई से किसानों की बढ़ी आय, डीएम ने सराहा आधुनिक खेती मॉडल

कानपुर नगर।

जनपद में किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कम लागत और कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। एकीकृत बागवानी विकास मिशन तथा “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना के तहत पॉलीहाउस और ड्रिप सिंचाई मॉडल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बुधवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने ऐसे ही दो सफल कृषि मॉडलों का निरीक्षण कर उनके विस्तार पर जोर दिया।
कल्याणपुर क्षेत्र में प्रगतिशील कृषक उद्यमी विराज भाटिया द्वारा लगभग 10 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में स्थापित पॉलीहाउस आधुनिक संरक्षित खेती का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। करीब 1.12 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस परियोजना में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के माध्यम से लगभग 55.95 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। पॉलीहाउस में वर्षभर खीरा, शिमला मिर्च और टमाटर जैसी फसलों का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे किसान को बेहतर आय प्राप्त हो रही है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि संरक्षित खेती से किसानों को मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से राहत मिलती है और उच्च गुणवत्ता वाली फसलें तैयार होती हैं, जिनका बाजार मूल्य भी अधिक मिलता है। उन्होंने कृषि एवं उद्यान विभाग को निर्देश दिए कि ऐसे नवाचारी किसानों के अनुभव अन्य कृषकों तक पहुंचाए जाएं ताकि अधिक किसान आधुनिक खेती को अपनाकर लाभ उठा सकें।
उप कृषि निदेशक आर.एस. वर्मा ने बताया कि जनपद में वर्तमान समय में छह पॉलीहाउस संचालित हैं, जिनमें खीरा, रंगीन शिमला मिर्च, टमाटर के साथ जरबेरा एवं कार्नेशन जैसे फूलों की खेती भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि संरक्षित खेती किसानों को परंपरागत खेती की तुलना में बेहतर आर्थिक लाभ दे रही है।
इसके बाद जिलाधिकारी ने ग्राम बिठूरकला में कृषक अशोक कुमार सिंह के खेत पर स्थापित ड्रिप सिंचाई प्रणाली का निरीक्षण किया। यहां दो हेक्टेयर क्षेत्र में शिमला मिर्च और लाल मिर्च की खेती ड्रिप पद्धति से की जा रही है। किसान ने बताया कि इस तकनीक को अपनाने के बाद पानी की खपत लगभग एक चौथाई रह गई है, जबकि उत्पादन में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई है। इससे वार्षिक आय में ढाई से तीन लाख रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।
उप कृषि निदेशक ने बताया कि ड्रिप प्रणाली के साथ फर्टिगेशन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिसके माध्यम से घुलनशील उर्वरकों को पानी के साथ सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। इससे उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ती है और फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है। वर्तमान समय में जनपद के 197 किसान ड्रिप इरीगेशन सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।
जिलाधिकारी ने ड्रिप सिंचाई को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था से जोड़ने पर बल देते हुए कहा कि इससे सिंचाई लागत में और कमी आएगी तथा भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सूक्ष्म सिंचाई और सोलर पंप योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिकाधिक किसानों को इससे जोड़ा जाए।

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