मनीष गुप्ता
कानपुर।
कानपुर के मरी कंपनी पुल के नीचे का रेलवे ट्रैक एक बार फिर बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। अतीत में हुए कई दर्दनाक हादसों को देखते हुए रेलवे विभाग द्वारा इस रास्ते को आम जनता के लिए कई बार बंद किया जा चुका है, ताकि लोग पटरियों पर न आएं और सुरक्षित रहें। लेकिन स्थानीय लोगों की लापरवाही और प्रशासनिक अनदेखी के कारण खतरा जस का तस बना हुआ है। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि इस प्रतिबंधित और खतरनाक रास्ते पर किस तरह नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रेलवे ट्रैक के बेहद नजदीक एक आदमी पटरी के पास बेफिक्र होकर सो रहा है, वहीं दूसरा आदमी बिल्कुल पटरी के किनारे बैठा हुआ है। इन्हें न तो अपनी जान की परवाह है और न ही तेज रफ्तार ट्रेनों का कोई खौफ।दिल्ली-लखनऊ रूट की गाड़ियां गुजरती हैं यहां से यह लापरवाही इसलिए और ज्यादा गंभीर हो जाती है क्योंकि यह ट्रैक बेहद व्यस्त और संवेदनशील है। कानपुर और लखनऊ से दिल्ली के लिए यहां से दिन-रात कई सुपरफास्ट गाड़ियां और मालगाड़ियां तेज रफ्तार में निकलती हैं। ऐसे हाई-स्पीड रूट पर पटरियों के पास लेटना या बैठना सीधे तौर पर मौत को गले लगाने जैसा है। प्रशासनिक मुस्तैदी पर सवाल जब रेलवे विभाग ने हादसों के मद्देनजर इस रास्ते को बंद कर रखा है, तो फिर इन लोगों का पटरियों तक पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों की इस खतरनाक बेफिक्री और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की ढीली गश्त के कारण यहां कभी भी कोई बड़ी घटना घट सकती है। क्षेत्रीय नागरिकों की मांग है कि रेलवे प्रशासन इस जगह पर सख्ती बढ़ाए ताकि दोबारा कोई दर्दनाक दुर्घटना न हो।
पटरी के पास नींद, सिर पर मौत का साया