फर्जी पुलिस बनाकर 12 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’, आतंकी फंडिंग के नाम पर 57 लाख की ठगी; अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच तेज
कानपुर में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा
कानपुर कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक बड़े डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 05 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से लोगों को फर्जी मामलों में फंसाकर मानसिक दबाव बनाता था और फिर उनसे भारी रकम ठग लेता था। पुलिस की इस कार्रवाई को हाल के समय की बड़ी साइबर सफलता माना जा रहा है।
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12 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा पीड़ित
जांच में सामने आया कि गिरोह ने एक पीड़ित को 09 अप्रैल से 21 अप्रैल तक लगातार डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस दौरान पीड़ित को यह विश्वास दिलाया गया कि वह किसी बड़े आपराधिक मामले, खासकर आतंकी फंडिंग में फंस चुका है। डर और दहशत के माहौल में पीड़ित को किसी से संपर्क करने से रोका गया और लगातार निगरानी में रखा गया।
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फर्जी पुलिस और एंटी करप्शन टीम का खेल
अभियुक्त खुद को पुलिस अधिकारी, एंटी करप्शन ब्यूरो और अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल और मोबाइल ऐप के माध्यम से पीड़ित से संपर्क करते थे। उन्होंने पूरा नकली सेटअप तैयार किया था, जिसमें वर्दी, बैकग्राउंड और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भरोसा पैदा किया जाता था।
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RTGS के जरिए कराई गई लाखों की ठगी
गिरोह ने पीड़ित को डराकर RTGS के माध्यम से अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए। अब तक की जांच में लगभग ₹57 लाख के ट्रांजेक्शन सामने आए हैं, जिनमें से कुछ रकम को पुलिस ने फ्रीज भी कर दिया है।
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मुख्य आरोपी समेत 5 गिरफ्तार, CISF कर्मी की भूमिका संदिग्ध
गिरफ्तार अभियुक्तों में मुख्य आरोपी राजू (निवासी झारखंड) और कई बैंक खाताधारक शामिल हैं। पूछताछ के दौरान CISF कर्मचारी दाउद अंसारी की संलिप्तता भी सामने आई है, जिसे पूछताछ के लिए लाया जा रहा है।
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5 राज्यों तक फैला नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन के संकेत
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह गिरोह केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि 5 राज्यों में सक्रिय था। इसके अलावा, गिरोह के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन होने के भी संकेत मिले हैं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
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मोबाइल, वाहन और डिजिटल साक्ष्य बरामद
अभियुक्तों के कब्जे से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और एक वाहन बरामद किया गया है। इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
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जांच जारी, और गिरफ्तारी संभव
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में अभी और गहराई से जांच की जा रही है। ठगी की रकम कहां-कहां इस्तेमाल हुई, किन-किन लोगों की भूमिका रही और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन कितना मजबूत है—इन सभी पहलुओं पर काम चल रहा है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
पुलिस की अपील: सतर्क रहें, डरें नहीं
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या खुद को पुलिस/एजेंसी बताने वाले व्यक्ति से सतर्क रहें। किसी भी प्रकार के दबाव या डर में आकर पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत नजदीकी पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।