बिना बड़ी सर्जरी बची जान: 10 सेमी फटी महाधमनी का सफल इलाज

कानपुर—शहर के पारस हॉस्पिटल में डॉक्टरों की टीम ने एक 67 वर्षीय बुजुर्ग मरीज़ को नई जिंदगी देकर चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। मरीज़ गिरीश चंद्र गौर ‘थोरेसिक एओर्टिक एन्यूरिज्म’ जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे थे, जिसमें शरीर की सबसे बड़ी धमनी (महाधमनी) 10 सेंटीमीटर तक फूल गई थी और किसी भी समय फटने का खतरा बना हुआ था।

जानलेवा स्थिति, हर पल खतरा

जांच में स्पष्ट हुआ कि महाधमनी की दीवार कमजोर हो चुकी थी और उसमें सूजन के कारण कभी भी फटने की आशंका थी। ऐसी स्थिति में आंतरिक रक्तस्राव से तत्काल मृत्यु का जोखिम बना रहता है। परिवार ने कई अस्पतालों में सलाह ली, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए कहीं से ठोस समाधान नहीं मिल पाया। अंततः मरीज़ को पारस हॉस्पिटल लाया गया।

बिना ओपन सर्जरी अपनाई आधुनिक तकनीक

डॉक्टरों ने पारंपरिक ओपन सर्जरी के बजाय आधुनिक ‘एंडोवैस्कुलर’ तकनीक को चुना, जिसमें बड़े चीरे की आवश्यकता नहीं होती। इस जटिल प्रक्रिया का नेतृत्व डॉ. सुनील कुमार (डायरेक्टर, वैस्कुलर सर्जरी और कार्डियोथोरेसिक) ने किया। टीम में डॉ. सुमित कुमार और डॉ. श्रीपत भी शामिल रहे।

छोटे छेद से बड़ी सफलता

सर्जनों ने जांघ की रक्त वाहिका के जरिए एक छोटे से छेद से विशेष ‘स्टेंट ग्राफ़्ट’ शरीर के अंदर पहुंचाया और क्षतिग्रस्त धमनी को सुरक्षित ढंग से रिपेयर किया। डॉ. सुनील कुमार के अनुसार, यह केस इसलिए चुनौतीपूर्ण था क्योंकि इसमें एन्यूरिज्म के साथ डिसेक्शन भी शामिल था। स्टेंट को इस तरह सटीकता से लगाना जरूरी था कि मस्तिष्क और अन्य अंगों की रक्त आपूर्ति प्रभावित न हो।

एडवांस्ड इमेजिंग से बनी रणनीति

डॉ. सुमित कुमार ने बताया कि विस्तृत सीटी स्कैन और आधुनिक इमेजिंग तकनीक की मदद से पूरे ऑपरेशन की सटीक योजना बनाई गई। एंडोवैस्कुलर तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज को कम दर्द होता है, जटिलताओं का खतरा घटता है और रिकवरी तेज़ होती है।

परिवार ने जताया आभार

मरीज़ की बेटी गुंजन गौर ने बताया कि कई अस्पतालों से निराशा मिलने के बाद पारस हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने उन्हें भरोसा दिया और पूरी प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने कहा कि अब उनके पिता पूरी तरह स्वस्थ हैं और जल्द ही डिस्चार्ज कर दिए जाएंगे।

तेजी से रिकवरी, जल्द छुट्टी

मरीज को भर्ती के दिन से ही इलाज शुरू कर दिया गया था और अब उनकी स्थिति पूरी तरह स्थिर है। डॉक्टरों के अनुसार, यह केस दिखाता है कि गंभीर वैस्कुलर बीमारियों में समय पर सही विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीक कितनी महत्वपूर्ण होती है।

प्रेसवार्ता में डॉ. बृजेश पांडे, डॉ. श्रीपत और डॉ. सुनील कुमार सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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