शुभ-अशुभ कर्मों का फल निश्चित, सुख-दुःख का चक्र अनवरत : कथा में संदेश

कानपुर। स्वरूपनगर स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर के 27वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर आचार्य अभिषेक शुक्ल ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में वाणी की वास्तविक सार्थकता भगवान के गुणों के वर्णन और यशगान में ही निहित है।उन्होंने कहा कि संसार में प्रत्येक प्राणी को अपने शुभ और अशुभ कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है। प्रारब्ध से कोई भी बच नहीं सकता। समय के अनुसार ही मनुष्य सुख और दुःख का अनुभव करता है। जीवन में सुख के बाद दुःख और दुःख के बाद सुख का आना एक प्राकृतिक चक्र है, जो निरंतर चलता रहता है।आचार्य ने आगे बताया कि मानव शरीर के प्रत्येक अंग का अपना आध्यात्मिक महत्व है। मस्तक का फल भगवान के चरणों में झुकना, हाथों का फल उनका अर्चन करना, मन का फल उनके गुणों का चिंतन करना और वाणी का सर्वोत्तम उपयोग भगवान गोविंद के गुणों का कीर्तन करना है।कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं जैसे माखन चोरी, कालिया नाग दमन और गोवर्धन पूजा का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।इस अवसर पर गोवर्धन पूजा का भव्य आयोजन किया गया तथा भगवान को छप्पन भोग अर्पित किए गए। मंदिर परिसर में गोवर्धन भगवान की आकर्षक झांकी भी सजाई गई, जिसने सभी का मन मोह लिया।कार्यक्रम में मंदिर समिति के प्रबंधक, ज्योतिषाचार्य नरेंद्र शास्त्री, विजयलक्ष्मी शर्मा, दीपा निगम, गीता निगम, सुषमा द्विवेदी, जे.पी. त्रिपाठी, सुभित चंदेल, लक्ष्य पांडे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

नमस्कार,J news India में आपका हार्दिक अभिनंदन हैं, यहां आपकों 24×7 के तर्ज पर पल-पल की अपडेट खबरों की जानकारी से रूबरू कराया जाएगा,खबर और विज्ञापन के लिए संपर्क करें- +91 9044953076,हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें साथ ही फेसबुक पेज को लाइक अवश्य करें।धन्यवाद