: बिकरू कांड: अवैध हथियार मामले में 4 दोषी

कानपुर। बहुचर्चित बिकरू कांड से जुड़े अवैध हथियारों की बरामदगी के मामले में कानपुर की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-5) की अदालत ने इस मामले में नामजद चार आरोपियों को अवैध शस्त्र रखने और बरामदगी से जुड़े अलग-अलग मुकदमों में दोषी करार दिया है। अदालत के इस फैसले को बिकरू कांड की न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य, बरामदगी के दस्तावेज, गवाहों के बयान तथा केस डायरी में दर्ज तथ्यों के आधार पर यह सिद्ध होता है कि आरोपियों के पास से अवैध हथियार और कारतूस बरामद किए गए थे। कोर्ट ने माना कि ये हथियार न केवल गैरकानूनी रूप से रखे गए थे, बल्कि इनका उपयोग गंभीर आपराधिक घटनाओं में किया जाना संभावित था, जिससे कानून-व्यवस्था को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ।
विदित हो कि 2 जुलाई 2020 की रात कानपुर के बिकरू गांव में कुख्यात अपराधी विकास दुबे और उसके गुर्गों ने पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला कर दिया था। इस हमले में अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिसमें तत्कालीन सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इस घटना ने पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में कानून-व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी थी।
इस भीषण घटना के बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए विकास दुबे के किलेनुमा घर और उसके सहयोगियों के विभिन्न ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। तलाशी अभियान के दौरान भारी मात्रा में अवैध असलहे, कारतूस, अत्याधुनिक हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। इन बरामदगियों के आधार पर पुलिस ने आर्म्स एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए थे, जिनकी सुनवाई लंबे समय से न्यायालय में लंबित थी।
मामले की सुनवाई के दौरान प्रगति की धीमी रफ्तार को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया था। हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कानपुर के पुलिस कमिश्नर और जिला शासकीय अधिवक्ता को तलब किया था तथा शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट की इस सख्ती के बाद निचली अदालत में कार्यवाही तेज हुई और गवाहों के बयान तथा साक्ष्यों की सुनवाई में तेजी आई।
तेजी से चली इस न्यायिक प्रक्रिया के परिणामस्वरूप अब एडीजे-5 कोर्ट ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया है। हालांकि, अभी सजा के बिंदु पर अंतिम निर्णय आना बाकी है। अदालत ने कहा है कि दोषियों की सजा की अवधि पर अगली सुनवाई में बहस की जाएगी, जिसमें अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने तर्क प्रस्तुत करेंगे।
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल अवैध हथियारों की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे बिकरू कांड की न्यायिक श्रृंखला का अहम हिस्सा है। उनका कहना है कि जिन हथियारों की बरामदगी हुई थी, वही हथियार कानून-व्यवस्था को चुनौती देने और पुलिस पर हमले जैसी गंभीर घटनाओं में इस्तेमाल किए गए थे। ऐसे में इस मामले में दोषसिद्धि कानून के शासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
गौरतलब है कि बिकरू कांड के बाद पुलिस ने व्यापक स्तर पर अभियान चलाकर मुख्य आरोपी विकास दुबे सहित कई अपराधियों को मुठभेड़ों में मार गिराया था, जबकि दर्जनों अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इन सभी के खिलाफ विभिन्न अदालतों में अलग-अलग मामलों की सुनवाई जारी है।
इस ताजा फैसले के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि बिकरू कांड से जुड़े अन्य मामलों में भी जल्द ही न्यायिक प्रक्रिया पूरी होगी और दोषियों को सजा मिलेगी, जिससे पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सकेगा और समाज में कानून के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

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