कानपुर। औद्योगिक नगरी कानपुर में एक बार फिर जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र की विधायक नसीम सोलंकी ने जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए विधानसभा अध्यक्ष को शिकायती पत्र भेजकर मोर्चा खोल दिया है।
विधायक ने सतीश महाना को लिखे पत्र में साफ तौर पर जिलाधिकारी, पुलिस कमिश्नर और नगर आयुक्त की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पिछले करीब एक महीने से वह लगातार इन अधिकारियों से संपर्क साधने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन न तो उनके फोन उठाए जा रहे हैं और न ही किसी प्रकार की प्रतिक्रिया दी जा रही है।
नसीम सोलंकी ने इसे जनप्रतिनिधियों के प्रति “अनुचित और असम्मानजनक व्यवहार” बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब अधिकारी फोन तक नहीं उठाएंगे, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे संभव होगा। कई बार स्टाफ फोन उठाता है, लेकिन संबंधित अधिकारी से बात नहीं कराई जाती और बाद में भी कोई कॉल बैक नहीं आता।
विधायक ने अपनी शिकायत को और गंभीर बनाते हुए एक हालिया घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक गंभीर सड़क दुर्घटना के दौरान देर रात उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया, ताकि पीड़ित को तुरंत मदद मिल सके, लेकिन किसी भी अधिकारी ने फोन उठाना जरूरी नहीं समझा। इस घटना ने उन्हें आहत किया और मजबूर होकर उन्हें विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखना पड़ा।
गौरतलब है कि इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना प्रदेश के सभी अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं कि वे जनप्रतिनिधियों के फोन अनिवार्य रूप से उठाएं और उन्हें प्राथमिकता दें। बावजूद इसके, कानपुर में इन निर्देशों का पालन न होने का आरोप अब खुलकर सामने आया है।
यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। विपक्ष ने इसे प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है। वहीं, विधायक का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो जनता के मुद्दों का समाधान गंभीर रूप से प्रभावित होगा और शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होंगे।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए इस पत्र के बाद शासन स्तर पर क्या कार्रवाई होती है और क्या अधिकारियों की कार्यशैली में कोई बदलाव आता है या नहीं।
फोन न उठाने पर विधायक का हंगामा