कानपुर। शिवराजपुर ब्लॉक के सैलहा (रानी निवादा) गांव में आयोजित ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय वृहद पशु आरोग्य मेला’ अव्यवस्थाओं के चलते विवादों में घिर गया। करीब 6.50 लाख रुपये के बजट के बावजूद मेले में किसानों, पशुपालकों और पशुओं को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल सकीं।
मेले में कुप्रबंधन की स्थिति यह रही कि सात घंटे तक तेज धूप में खड़े पशुओं के लिए न तो छाया की व्यवस्था थी और न ही पीने के पानी का इंतजाम। भूख-प्यास से बेहाल पशुओं की हालत देख पशुपालकों में आक्रोश फैल गया। इसी दौरान गर्मी और प्यास के चलते एक बुजुर्ग किसान बेहोश होकर गिर पड़ा, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
भोजन वितरण को लेकर भी सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारियों के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था की गई, जबकि आम जनता और बच्चों को मात्र एक समोसा देकर टाल दिया गया। पशुओं के लिए लाया गया हरा चारा सड़ा हुआ मिला और भूसे का वितरण भी संतुलित नहीं रहा।
मेले का उद्घाटन क्षेत्रीय विधायक राहुल बच्चा सोनकर और ब्लॉक प्रमुख शुभम बाजपेई ने किया था। वहीं, यह भी चर्चा रही कि भीड़ दिखाने के लिए पशु किराए पर मंगवाए गए और लोगों को प्रलोभन देकर बुलाया गया। पर्याप्त प्रचार-प्रसार के अभाव में यह आयोजन सरकारी धन के दुरुपयोग का उदाहरण बनकर रह गया।
अब सवाल यह है कि पशु आरोग्य के नाम पर आयोजित इस मेले में हुई भारी लापरवाही पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।
पशु मेले में बदइंतजामी, किसान बेहाल