डीएम के सहारे टूटी जिंदगी में लौटी उम्मीद

कानपुर। नरवल तहसील के बिधनू ब्लॉक के नगवां गांव में एक परिवार पर आई लगातार त्रासदियों ने दो भाई-बहन की जिंदगी को अंधेरे में धकेल दिया था। मां की मौत, बहन की आत्महत्या और पिता की बेरुखी के कारण दोनों बच्चे लगभग बेसहारा हो गए थे। ऐसे मुश्किल समय में जिलाधिकारी Jitendra Pratap Singh ने आगे बढ़कर उनकी मदद की और उनके जीवन में फिर से उम्मीद की किरण जगा दी।
नगवां गांव की दिव्यांशी सिंह (21) और उसका छोटा भाई हर्षित सिंह (13) पिछले कई महीनों से गंभीर पारिवारिक संकट का सामना कर रहे थे। अप्रैल 2025 में उनकी मां मधु का निधन हो गया। मां के जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारियां अचानक बच्चों के कंधों पर आ गईं। इसी बीच उनके पिता मनोज सिंह, जो शराब की लत से ग्रस्त बताए जाते हैं, ने दिव्यांशी की शादी एक ऐसे युवक से तय कर दी जो स्वयं भी शराब का आदी था।

इस निर्णय से आहत छोटी बहन शानू ने जनवरी 2026 में आत्महत्या कर ली। इस दर्दनाक घटना ने पूरे परिवार को भीतर तक झकझोर दिया। बहन की मौत के बाद पिता भी घर से लगभग अलग-थलग हो गए, जिससे दिव्यांशी और हर्षित पूरी तरह अकेले पड़ गए। परिवार की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही थी और बच्चों के सामने जीवनयापन से लेकर पढ़ाई तक का संकट खड़ा हो गया था।

गांव के प्रधान आशीष वाजपेयी ने जब इस परिवार की स्थिति देखी तो उन्होंने इसकी जानकारी जिलाधिकारी को दी। सूचना मिलते ही डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने दोनों बच्चों से अभिभावक की तरह संवाद किया, उनका हौसला बढ़ाया और भरोसा दिलाया कि प्रशासन उनके साथ खड़ा है।

डीएम के निर्देश पर प्रशासनिक स्तर पर तुरंत कई कदम उठाए गए। सबसे पहले बच्चों के जर्जर घर की मरम्मत और रंग-रोगन कराया गया ताकि वे सुरक्षित वातावरण में रह सकें। इसके साथ ही पात्रता के आधार पर उनका अंत्योदय राशन कार्ड बनवाया गया, जिससे उन्हें नियमित रूप से खाद्यान्न उपलब्ध हो सके।

स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए दोनों बच्चों के आयुष्मान कार्ड भी बनवाए गए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें मुफ्त इलाज मिल सके। उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उन्हें मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इसके अलावा तत्काल राहत के रूप में राशन सामग्री भी उपलब्ध कराई गई, जिससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी हो सकें।

परिवार से जुड़ी एक और बड़ी समस्या भी डीएम के हस्तक्षेप से सुलझ गई। भूमि विक्रय के बदले मिलने वाली लगभग साढ़े चार लाख रुपये की धनराशि एक व्यक्ति लंबे समय से देने में टालमटोल कर रहा था। जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रशासन ने पहल करते हुए यह पूरी राशि बच्चों के खाते में दिलाई, जिससे उनके भविष्य को आर्थिक सहारा मिल सका।
गत शनिवार संपूर्ण समाधान दिवस से लौटते समय जिलाधिकारी स्वयं नगवां गांव पहुंचे। उन्होंने दिव्यांशी और हर्षित से मुलाकात की, उन्हें होली का उपहार दिया और उनका मनोबल बढ़ाया। बच्चों से बातचीत करते हुए डीएम ने कहा कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और साहस के साथ चुनौतियों का सामना करना चाहिए।
कुछ समय पहले तक जिस घर में दुख, निराशा और बेबसी का साया था, वहां अब धीरे-धीरे उम्मीद की रोशनी लौटती दिखाई दे रही है। प्रशासन के सहयोग और अपने हौसले के सहारे दिव्यांशी और हर्षित अब फिर से जीवन को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। गांव के लोगों का भी कहना है कि प्रशासन की इस पहल ने बच्चों को नया सहारा दिया है और उनके भविष्य के लिए उम्मीद जगाई है।

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