कानपुर।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मसौधा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) का भ्रमण कर वहां आयोजित कृषक संवाद कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने किसानों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि वैज्ञानिक पद्धतियों, आधुनिक तकनीकों और नवाचारों को अपनाकर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। आईसीएआर अटारी जोन-3 के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि इस कृषक संवाद में जनपद के विभिन्न विकास खंडों से आए प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। किसानों ने अपनी खेती से जुड़े अनुभव साझा किए और नई तकनीकों को लेकर सवाल भी रखे, जिनका केंद्रीय मंत्री ने सहज और व्यावहारिक तरीके से उत्तर दिया।
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने आधुनिक कृषि तकनीकों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए ड्रोन तकनीक, कृषि यंत्रीकरण, फसल विविधीकरण, जल संरक्षण और एकीकृत कृषि प्रणाली को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि परंपरागत खेती के साथ-साथ तकनीकी नवाचारों को जोड़ने से उत्पादन लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा। सरकार किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रही है।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने प्रदेश में संचालित कृषि योजनाओं और किसानों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी तथा किसानों से सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रगतिशील कृषक शोभाराम द्वारा अपनाई गई एकीकृत कृषि प्रणाली की विशेष रूप से सराहना की, जिसमें फसल उत्पादन के साथ पशुपालन और अन्य गतिविधियों को जोड़कर आय के कई स्रोत विकसित किए गए हैं। साथ ही उन्होंने सबीना खातून द्वारा ड्रोन तकनीक के अभिनव उपयोग को भी प्रेरणादायक बताया और कहा कि ऐसे प्रयोग देश के अन्य किसानों के लिए उदाहरण बन सकते हैं।
कृषक संवाद के दौरान किसानों ने खाद-बीज की उपलब्धता, फसल बीमा, विपणन, लागत मूल्य और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान जैसे मुद्दों को भी उठाया। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को इन समस्याओं के समाधान के लिए गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर डॉ. आर.बी. सिंह, प्रसार निदेशक आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, सहित कृषि विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय कृषि मंत्री एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से संबद्ध कृषि विज्ञान केंद्र मसौधा परिसर में अमरूद का पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित कृषि का संदेश दिया।
किसानों से सीधा संवाद