IIT कानपुर 1976 बैच का स्वर्ण जयंती पुनर्मिलन, 13.40 करोड़ का योगदान

कानपुर
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर। आईआईटी कानपुर की 1976 बैच ने अपनी शिक्षा पूर्ण किए 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर स्वर्ण जयंती (गोल्डन जुबिली) पुनर्मिलन का भव्य आयोजन परिसर में किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत और विदेशों से बड़ी संख्या में पूर्व छात्र संस्थान पहुंचे, जहां उन्होंने अपने सहपाठियों से दोबारा मुलाकात कर पुरानी स्मृतियों को ताजा किया और अपनी मातृसंस्था से जुड़े भावनात्मक रिश्तों को और मजबूत किया।
स्वर्ण जयंती समारोह के अंतर्गत 1976 बैच ने आईआईटी कानपुर की विभिन्न शैक्षणिक, अनुसंधान और संस्थागत पहलों के समर्थन के लिए कुल 13.40 करोड़ रुपये के सामूहिक योगदान की घोषणा की। यह योगदान संस्थान के प्रति बैच की गहरी कृतज्ञता और आईआईटी कानपुर की निरंतर प्रगति एवं उत्कृष्टता में योगदान देने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पुनर्मिलन के दौरान पूर्व छात्रों को संस्थान के नेतृत्व, संकाय सदस्यों और वर्तमान विद्यार्थियों के साथ संवाद करने का अवसर मिला। साथ ही उन्होंने पिछले पांच दशकों में आईआईटी कानपुर द्वारा अर्जित शैक्षणिक, अनुसंधान एवं अवसंरचनात्मक उपलब्धियों को भी करीब से देखा। पूर्व छात्रों ने 1970 के दशक में परिसर में बिताए अपने छात्र जीवन को भावुकता के साथ याद किया, जिसने उनके पेशेवर जीवन और मूल्यों की नींव रखी।

इस अवसर पर आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि आईआईटी कानपुर अपने पूर्व छात्रों की उपलब्धियों और मूल्यों पर गर्व करता है। 1976 बैच का यह स्वर्ण जयंती पुनर्मिलन न केवल पांच दशकों की व्यक्तिगत और पेशेवर उपलब्धियों का उत्सव है, बल्कि संस्थान के साथ उनके स्थायी संबंध का भी प्रतीक है। उनका सहयोग भविष्य की पीढ़ियों के लिए संस्थान को और अधिक सशक्त बनाएगा।

बैच की ओर से मुक्तेश पंत ने बताया कि 1976 बैच की ओर से संस्थान को सहयोग देने की एक दीर्घकालिक परंपरा रही है। उन्होंने लगभग 25 वर्ष पहले किए गए उस योगदान को याद किया, जिसे संस्थान ने विवेकपूर्ण निवेश के माध्यम से बढ़ाया और बाद में LVAD परियोजना में उपयोग किया गया। इससे आईआईटी कानपुर के गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी में कृत्रिम हृदय अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य की नींव पड़ी।

इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए बैच ने स्वर्ण जयंती के अवसर पर 10 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था, जिसे पूर्व छात्रों के सामूहिक प्रयास से पार करते हुए कुल योगदान 13.40 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि अपेक्षाकृत छोटे और कई सेवानिवृत्त सदस्यों वाले बैच ने भी संस्थान के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।
पूर्व छात्रों की सक्रिय भूमिका की सराहना करते हुए संसाधन एवं पूर्व छात्र डीन प्रो. अमेय करकरे ने कहा कि आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं और 1976 बैच आजीवन जुड़ाव की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनका उदार योगदान विद्यार्थियों के अवसरों, संकाय उत्कृष्टता और संस्थागत विकास को नई दिशा देगा तथा युवा बैचों को भी संस्थान से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करेगा।
1976 बैच का यह स्वर्ण जयंती पुनर्मिलन भावनाओं, मित्रता और सार्थक सहभागिता से परिपूर्ण रहा। आईआईटी कानपुर ने बैच के इस योगदान और प्रतिबद्धता के लिए आभार व्यक्त करते हुए शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के अपने मिशन को आगे बढ़ाने में उनके निरंतर सहयोग की अपेक्षा जताई।

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