गैंगस्टर मामले में इरफ़ान सोलंकी को हाईकोर्ट से झटका, याचिका खारिज, ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगा मुकदमा

कानपुर/प्रयागराज। सीसामऊ विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक इरफ़ान सोलंकी की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को गैंगस्टर एक्ट के तहत उनके खिलाफ चल रही कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद अब निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) में गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा पूर्व की तरह जारी रहेगा।
पूर्व विधायक इरफ़ान सोलंकी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि उनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत दर्ज मामले और ट्रायल कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्यवाही को निरस्त किया जाए। याचिका में उन्होंने यह तर्क दिया था कि उनके विरुद्ध दर्ज गैंगस्टर का मामला कानूनन टिकाऊ नहीं है। हालांकि न्यायमूर्ति की पीठ ने मामले की गंभीरता और प्रस्तुत तथ्यों को देखते हुए इस याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई कार्रवाई प्रथम दृष्टया कानून के अनुरूप है और इसे रद्द करने का कोई ठोस आधार न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जा सका। अदालत ने यह भी कहा कि मामले से जुड़े तथ्य और आरोप ऐसे हैं, जिनकी सुनवाई ट्रायल कोर्ट में ही की जानी उचित होगी।
उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद 12 जनवरी को सुनवाई पूरी कर ली थी और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को निर्णय सुनाते हुए न्यायालय ने इरफ़ान सोलंकी की ओर से रखी गई दलीलों को अपर्याप्त और असंतोषजनक बताया।
गौरतलब है कि कानपुर पुलिस ने इरफ़ान सोलंकी और उनके सहयोगियों के खिलाफ संगठित अपराध, रंगदारी और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के आरोपों के आधार पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस की कार्रवाई के बाद इरफ़ान सोलंकी ने इस कानूनी शिकंजे को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अब वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली है।
बताया जाता है कि इरफ़ान सोलंकी पहले से ही आगजनी के एक मामले में सजा काट रहे हैं, जिसके चलते उनकी विधानसभा सदस्यता भी रद्द हो चुकी है। अब गैंगस्टर मामले में हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद उनकी कानूनी परेशानियां और बढ़ गई हैं। साथ ही यह फैसला उनके राजनीतिक भविष्य के लिए भी एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद कानपुर के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लगातार मिल रही कानूनी असफलताओं से इरफ़ान सोलंकी की सियासी राह और अधिक कठिन होती जा रही है, वहीं आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में और भी अहम मोड़ ले सकती है।

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