कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर सहित आसपास के पूरे क्षेत्र में लगातार गिरते तापमान और बढ़ती ठंड ने स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को गंभीर बना दिया है। सर्दी के मौसम का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है और इसका सबसे बड़ा प्रमाण शहर के पारस हेल्थ सहित सभी प्रमुख अस्पतालों में निमोनिया के मामलों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी के रूप में सामने आ रहा है। चिकित्सकों के अनुसार बीते कुछ सप्ताहों में यह मौसमी वृद्धि हर आयु वर्ग में देखी जा रही है, लेकिन छोटे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग इसकी चपेट में सबसे अधिक आ रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में बनने वाला वातावरण श्वसन संक्रमणों के लिए अत्यंत अनुकूल होता है। ठंडी हवा, बंद कमरों में लंबे समय तक रहना, पर्याप्त वेंटिलेशन की कमी और धूप का अभाव शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है। ऐसे में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से सक्रिय होकर फेफड़ों तक संक्रमण फैला देते हैं, जिससे निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
अस्पतालों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, भर्ती होने वाले मरीजों में 2 महीने से 5 वर्ष तक के बच्चों की संख्या चिंताजनक है। लगभग 64 प्रतिशत बच्चों में गंभीर निमोनिया के लक्षण पाए जा रहे हैं, जिनमें तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी और लगातार खांसी प्रमुख हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों में बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है।
शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
मामले की गंभीरता पर पारस हेल्थ के कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शिवम दीक्षित ने बताया कि सर्दियों में निमोनिया अक्सर अचानक नहीं होता, बल्कि यह धीरे-धीरे विकसित होता है। जब लोग सर्दी-जुकाम, खांसी या हल्की सांस की तकलीफ को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, तब संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचकर गंभीर रूप ले लेता है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और उचित इलाज से न केवल संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है, बल्कि अस्पताल में भर्ती होने की नौबत भी टाली जा सकती है।
वहीं, पारस हेल्थ के फैसिलिटी डायरेक्टर रजत बजाज ने बताया कि हर वर्ष सर्दियों में सांस से जुड़ी बीमारियों के मामलों में वृद्धि होती है। इसे देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने त्वरित स्क्रीनिंग, आधुनिक जांच सुविधाएं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की है, ताकि मरीजों को समय रहते उचित इलाज मिल सके और जटिलताओं से बचा जा सके।
निमोनिया के गंभीर संकेतों को पहचानना जरूरी
चिकित्सकों के अनुसार निमोनिया गंभीर होने से पहले शरीर कुछ स्पष्ट संकेत देता है, जिन्हें पहचानना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद आवश्यक है। इनमें लगातार खांसी के साथ तेज बुखार आना, सांस लेते या खांसते समय सीने में दर्द होना, सांस लेते समय घरघराहट या सीटी जैसी आवाज आना, अत्यधिक थकान, कमजोरी और भूख न लगना शामिल हैं। बुजुर्गों में इसके लक्षण और भी अलग हो सकते हैं, जैसे अचानक भ्रम की स्थिति पैदा होना या शारीरिक शिथिलता बढ़ जाना।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय, सावधानी से टाली जा सकती है बीमारी
चिकित्सकों ने इस मौसमी बीमारी से बचाव के लिए प्रिवेंटिव केयर पर विशेष जोर दिया है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से हाथ धोएं और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर मास्क का प्रयोग करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और धूम्रपान से पूरी तरह बचें। बच्चों और बुजुर्गों के लिए इन्फ्लूएंजा और न्यूमोकोकल वैक्सीन लगवाने की भी सिफारिश की गई है, जिससे गंभीर संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि यदि खांसी, बुखार या सांस लेने में तकलीफ 2 से 3 दिनों से अधिक समय तक बनी रहती है, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत नजदीकी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर उपचार ही निमोनिया से बचाव और स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
कानपुर समेत पूरे क्षेत्र में ठंड बढ़ते ही निमोनिया के मामलों में उछाल, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित