कानपुर। भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के कानपुर में प्रथम आगमन से पहले ही शहर का सियासी पारा चढ़ गया है। स्वागत की तैयारियों के बीच गुरुवार को किदवई नगर विधानसभा क्षेत्र में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और स्थानीय विधायक महेश त्रिवेदी के समर्थक होर्डिंग लगाने को लेकर आमने-सामने आ गए। मामूली कहासुनी से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते तीखी नोंक-झोंक और झड़प में तब्दील हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, किदवई नगर क्षेत्र में प्रदेश अध्यक्ष के भव्य स्वागत को लेकर जोर-शोर से तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक वर्चस्व दिखाने की होड़ में दोनों गुटों के बीच तनाव पैदा हो गया। आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के पहले से लगे पोस्टर के ऊपर विधायक महेश त्रिवेदी समर्थकों द्वारा नई होर्डिंग लगाने का प्रयास किया गया, जिसका महाना समर्थकों ने कड़ा विरोध किया।
विरोध के दौरान दोनों पक्षों के कार्यकर्ता मंच के पास ही आपस में भिड़ गए। पोस्टर को ऊंचा रखने और अपने नेता की तस्वीर प्रमुखता से दिखाने की होड़ में माहौल पूरी तरह गर्म हो गया। कुछ देर के लिए स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मौके पर मौजूद लोग हतप्रभ रह गए। यह दृश्य वहां से गुजर रही आम जनता के लिए भी परेशानी का कारण बना, जिन्हें हंगामे के चलते रुकना पड़ा।
इस घटनाक्रम को लेकर मौके पर मौजूद लोगों में यह चर्चा भी रही कि आम जनसमस्याओं पर शांत रहने वाले कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं की तस्वीर ऊपर लगवाने के लिए आपस में ही उलझते नजर आए। पोस्टर और होर्डिंग को लेकर हुआ यह ‘शक्ति प्रदर्शन’ भाजपा के अंदरूनी गुटबाजी को सार्वजनिक मंच पर उजागर करता दिखा।
काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रहने के बाद मौके पर पहुंचे कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। कड़ी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों को शांत कराया गया और स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सका। हालांकि, तब तक यह घटना वहां मौजूद लोगों और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन चुकी थी।
प्रदेश अध्यक्ष के पहले कानपुर दौरे जैसी अहम राजनीतिक घटना से ठीक पहले सामने आई इस गुटबाजी ने भाजपा संगठन के भीतर अनुशासन, समन्वय और नेतृत्व नियंत्रण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं विपक्षी खेमे में भी इस ‘पोस्टर वॉर’ को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इस अनुशासनहीनता को किस रूप में लेता है और क्या ऐसे मामलों पर संगठन की ओर से कोई सख्त संदेश दिया जाता है या यह
प्रदेश अध्यक्ष के आगमन से पहले भाजपा में पोस्टर वॉर