कुशाग्र कनोडिया हत्याकांड में आया फैसला, शिक्षिका रचिता समेत तीनों आरोपी हत्या व साजिश के दोषी करार

कानपुर। शहर के बहुचर्चित और हृदय विदारक कुशाग्र कनोडिया हत्याकांड में न्याय की घड़ी अब बेहद करीब आ गई है। कानपुर की विशेष अदालत ने मंगलवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इस जघन्य हत्याकांड के तीनों मुख्य आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने साफ तौर पर माना कि शिक्षिका रचिता वत्स, उसके प्रेमी प्रभात शुक्ला और उनके सहयोगी शिवा ने मिलकर मासूम कुशाग्र का अपहरण किया और फिर साजिश के तहत उसकी नृशंस हत्या कर दी।कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए ठोस सबूतों, तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर तीनों आरोपियों को अपहरण, हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी माना है। हालांकि, दोषियों को दी जाने वाली सजा पर फैसला 22 जनवरी को सुनाया जाएगा। अब यह तय किया जाएगा कि तीनों को उम्रकैद की सजा मिलेगी या फिर फांसी के फंदे तक पहुंचाया जाएगा।
फैसले के दौरान अदालत का माहौल बेहद भावुक और तनावपूर्ण रहा। जैसे ही जज ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया, कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया। तीनों दोषियों के चेहरों पर खौफ और घबराहट साफ दिखाई दे रही थी। वहीं, अदालत के बाहर फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे कुशाग्र के परिजनों की आंखों से आंसू छलक पड़े। वर्षों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे परिजन एक-दूसरे को ढांढस बंधाते नजर आए।
कुशाग्र के पिता और अन्य परिजनों ने मीडिया से रुंधे गले में बातचीत करते हुए कहा,
“हमारे मासूम बेटे को जिस बेरहमी से मौत के घाट उतारा गया, उसके लिए इन दरिंदों को फांसी से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। 22 जनवरी को कानून इन गुनहगारों को उनके किए की सजा जरूर देगा।”
गौरतलब है कि कानपुर के एक बड़े कारोबारी के बेटे कुशाग्र कनोडिया का अपहरण कर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज मामले ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था, क्योंकि हत्या की साजिश रचने वाली कोई और नहीं बल्कि कुशाग्र की अपनी शिक्षिका रचिता वत्स थी। उसने अपने प्रेमी प्रभात शुक्ला के साथ मिलकर फिरौती वसूलने के इरादे से कुशाग्र को जाल में फंसाया और पकड़े जाने के डर से उसकी हत्या कर दी। बाद में इस वारदात में सहयोगी शिवा की भूमिका भी सामने आई।
पुलिस ने इस मामले में कड़ी मशक्कत, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे हत्याकांड की गुत्थी सुलझाई थी। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने सभी को झकझोर दिया था और समाज में गहरी नाराजगी पैदा कर दी थी। फैसले के मद्देनजर कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच तीनों दोषियों को कड़ी सुरक्षा में वापस जेल भेज दिया गया। अब पूरे कानपुर की निगाहें 22 जनवरी पर टिकी हैं, जब अदालत यह तय करेगी कि कुशाग्र के हत्यारों को उम्रकैद की सजा दी जाएगी या फिर उन्हें फांसी की सजा सुनाई जाएगी।

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