मनीष गुप्ता
कानपुर। शहर में मोमोज और फिंगर के साथ परोसी जाने वाली लाल रंग की चटनी अब स्वाद नहीं बल्कि बीमारी की वजह बनती जा रही है। तस्वीर में दिखाई दे रही यह चटनी अरारोट, लाल मिर्च और केमिकल रंगों को मिलाकर तैयार की जाती है और सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसे गरमा-गरम हालत में पॉलिथीन में भर दिया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जब गर्म खाद्य पदार्थ पॉलिथीन के संपर्क में आते हैं तो पॉलिथीन से निकलने वाले हानिकारक केमिकल जैसे डाइऑक्सिन और BPA खाने में घुल जाते हैं, जो लंबे समय तक शरीर में जाने से कैंसर, लिवर और किडनी डैमेज, हार्मोन असंतुलन तथा पेट और आंतों की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। चटनी में इस्तेमाल किए जा रहे कृत्रिम लाल रंग भी बेहद खतरनाक बताए जाते हैं, क्योंकि कई जगहों पर फूड-ग्रेड रंग की जगह औद्योगिक डाई का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए ज़हर के समान है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सस्ती और अधिक मुनाफे की लालच में दुकानदार नियमों को ताक पर रखकर यह चटनी खुलेआम बेच कर आम जनमानस के साथ उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे है जबकि खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी न के बराबर दिखाई देती है। डॉक्टरों की साफ चेतावनी है कि बच्चों और युवाओं में मोमोज और फिंगर का बढ़ता चलन भविष्य में कैंसर और गंभीर बीमारियों की बड़ी वजह बन सकता है। अब सवाल यह है कि क्या खाद्य सुरक्षा विभाग ऐसे विक्रेताओं पर कार्रवाई करेगा।
मोमोज के साथ बीमारी फ्री! गरम चटनी पॉलिथीन में, कैंसर का खतरा