शेयर मार्केट–IPO में निवेश के नाम पर साइबर ठगी करने वाला गिरोह गिरफ्तार, 8 आरोपी जेल भेजे गए

कानपुर,
शेयर मार्केट एवं IPO में अधिक मुनाफे का लालच देकर WhatsApp ग्रुप और फर्जी ट्रेडिंग एप के माध्यम से साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह का साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए 08 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त के निर्देशन में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत, पुलिस उपायुक्त अपराध एवं अपर पुलिस उपायुक्त अपराध के मार्गदर्शन में की गई।
जांच में सामने आया कि साइबर अपराधियों द्वारा पीड़ित को “LAUNCH CLUB H49” नामक WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया, जिसमें स्वयं को SEBI रजिस्टर्ड कंपनी का प्रतिनिधि बताकर शेयर ट्रेडिंग से जुड़े टिप्स व एनालिसिस साझा किए जाते थे। आरोपियों द्वारा भेजे गए लिंक के माध्यम से “Ventura Globle” नामक फर्जी ट्रेडिंग एप डाउनलोड कराई गई, जिसमें प्रारंभ में मुनाफा दिखाकर तथा कुछ धनराशि निकालने की अनुमति देकर पीड़ित का विश्वास जीता गया। इसके बाद ग्रुप के सदस्यों द्वारा अधिक से अधिक निवेश करने का दबाव बनाया गया, जिसके प्रभाव में आकर पीड़ित ने विभिन्न तिथियों में अपने बैंक खातों से करोड़ों रुपये निवेश कर दिए।
दिनांक 11.11.2025 को आरोपियों द्वारा Insider Trading में कथित गिरफ्तारी का भय दिखाते हुए सभी खातों पर 20 प्रतिशत पेनल्टी लगाए जाने की बात कही गई तथा अकाउंट अनफ्रीज कराने के नाम पर अतिरिक्त धनराशि की मांग की गई, जिससे पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। पीड़ित की तहरीर पर थाना साइबर क्राइम में मु0अ0सं0-72/2025, धारा 318(4) BNS व 66D आईटी एक्ट के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया। SEBI से ई-मेल के माध्यम से सत्यापन कराने पर संबंधित कंपनी, ट्रेडिंग एप एवं दस्तावेज पूर्णतः फर्जी पाए गए।
दिनांक 26.12.2025 को मुखबिर की सूचना पर साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पुराना कानपुर सेंट्रल स्टेशन रोड, लोको कॉलोनी क्षेत्र में घेराबंदी कर एक काली स्कॉर्पियो वाहन (UP-71 BF-6111) को रोककर उसमें सवार 08 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान अभियुक्तों के पास से 13 मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंकिंग व डिजिटल दस्तावेज, डेबिट कार्ड, QR कोड, Telegram एवं WhatsApp चैट, क्रिप्टो करेंसी (USDT) वॉलेट विवरण सहित साइबर ठगी से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए।
डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया कि ठगी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों से USDT क्रिप्टो करेंसी में परिवर्तित कर डिजिटल वॉलेट्स के माध्यम से आगे ट्रांसफर किया जाता था। जांच के दौरान एक प्रमुख क्रिप्टो वॉलेट को फ्रीज कराया गया, जिसमें लगभग ₹7 लाख मूल्य की USDT पाई गई, जबकि करीब ₹1 करोड़ के लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। अभियुक्तों के बयानों से यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रत्येक अभियुक्त की भूमिका पूर्व-निर्धारित थी—कोई बैंक खाते उपलब्ध कराता था, कोई खातों की जांच करता था, कोई मुख्य फ्रॉड संचालक से संपर्क में रहता था तथा कमीशन का आपसी बंटवारा किया जाता था।
उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्तों के विरुद्ध धारा 318(4)/338/81(2) भारतीय न्याय संहिता एवं 66D आईटी एक्ट के तहत अपराध सिद्ध पाए जाने पर सभी अभियुक्तों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। बरामद सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित कर आगे की तकनीकी जांच एवं अन्य संलिप्त व्यक्तियों की तलाश जारी है।
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे WhatsApp/Telegram ग्रुप, अनजान लिंक, फर्जी ट्रेडिंग एप एवं अधिक मुनाफे के लालच से बचें तथा किसी भी निवेश से पूर्व SEBI की आधिकारिक वेबसाइट से सत्यापन अवश्य करें।

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