मनीष गुप्ता
कानपुर। शुक्रवार को दिसंबर स्पैड एवं T1EUP 2025 के तत्वाधान में डायबिटीज जागरूकता पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सुबह 10:30 बजे शुरू हुई इस विशेष मीटिंग में विशेषज्ञों ने कहा कि “डायबिटीज मैनेजमेंट समाज की जागरूकता के बिना संभव नहीं है।” इसी उद्देश्य से कानपुर विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ IMA की पूर्व अध्यक्ष डॉ. नंदिनी रस्तोगी, मेडिकल कॉलेज की विभागाध्यक्ष डॉ. ऋचा गिरी, विश्वविद्यालय के डॉ. प्रवीण कटियार, IMA कानपुर अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा और सचिव डॉ. शालिनी मोहन ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम में देशभर से आए विशेषज्ञों ने अपने अनुभवों और शोध आधारित जानकारियों से छात्रों को जागरूक किया। लखनऊ से आए डॉ. अजय तिवारी ने विभिन्न प्रकार की डायबिटीज—टाइप 1, टाइप 2, टाइप 3 आदि—पर विस्तार से जानकारी दी। मेडिकल कॉलेज कानपुर के प्रो. डॉ. एस. के. गौतम ने डायबिटीज की पहचान और लक्षणों पर व्याख्यान दिया। लखनऊ की डॉ. हेमाली झा ने डायबिटीज के बेसिक मैनेजमेंट पर चर्चा की, जबकि सविता अग्रवाल ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों और युवाओं के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। बेंगलुरु से आए डॉ. श्रीकांता ने बच्चों को मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार करने और शुगर कंट्रोल के महत्व पर बात की। पुणे की डॉ. सजली मेहता ने बताया कि बच्चे अक्सर ब्लड शुगर क्यों नहीं नापते और इससे क्या जोखिम होते हैं। प्रयागराज की डॉ. अमातुल फातिमा ने कार्बोहाइड्रेट काउंटिंग पर उपयोगी सत्र लिया।
दोपहर में टाइप 1 एडवोकेट्स—वे युवा जो खुद डायबिटीज मैनेजमेंट में माहिर होकर दूसरों की मदद करते हैं—का संगोष्ठी सत्र हुआ, जिसमें अनम, प्रशांत, मनी, आयुष, और दिल्ली से महक ढींगरा ने सोशल मीडिया और समाज से जुड़ाव पर चर्चा की। औरंगाबाद की डॉ. अर्चना सारडा ने टाइप 1 डायबिटीज मैनेजमेंट की चुनौतियों पर विस्तार से बात की। सत्र का संयोजन लखनऊ की डॉ. नेहा अग्रवाल ने किया।
इसके पश्चात बच्चों द्वारा किए गए उपयोगी कार्यों की प्रस्तुति पर आधारित एक इंटरएक्टिव सत्र भी हुआ, जिसका संचालन बेंगलुरु से डॉ. शुचि चुग और कानपुर के सीताराम खत्री ने किया। ओपन माइक सत्र में बच्चों ने अपनी उपलब्धियाँ और अनुभव साझा किए। यह पूरा सत्र डॉ. मनीषा गुप्ता द्वारा संचालित किया गया।
शाम को आयोजित विशेष मेटाबॉलिक सिम्पोजियम में बच्चों और युवाओं में बढ़ते वजन, उनकी सेहत और लाइफस्टाइल मैनेजमेंट पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। केजीएमयू, लखनऊ के प्रो. डॉ. कौसर उस्मान ने लाइफस्टाइल और वजन प्रबंधन पर जोर दिया। एसजीएलटी-2 इन्हिबिटर दवाओं के लाभों पर डॉ. नरसिंह वर्मा ने जानकारी दी। पांडिचेरी से आए डॉ. ए.के. दास ने जीएलपी-1 दवाओं पर चर्चा की, जबकि एसजीपीजीआई लखनऊ के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने नई दवा टेज़ेपेटाइड के प्रभाव बताए। अहमदाबाद के डॉ. बंसी साबु ने वजन घटाने वाली ओरल दवाओं पर चर्चा की। यूनाइटेड किंगडम के ब्रिस्टल से आए डॉ. साइमन हेलर ने लो ब्लड शुगर की चुनौतियों पर विस्तार से बात रखी।
कार्यक्रम के अंत में देश के पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजी क्षेत्र के जनक माने जाने वाले डॉ. पी.एस.एन. मेनन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। सम्मान प्रदान करने वालों में डॉ. अनुराग बाजपेयी, डॉ. ऋषि शुक्ला और डॉ. ए.के. दास शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय काला ने की, जबकि डॉ. अतुल कपूर विशेष अतिथि रहे। इस अवसर पर डॉ. ऋषि शुक्ला, डॉ. दीपक याज्ञिक, डॉ. भास्कर गांगुली, डॉ. अनुराग वाजपेयी, डॉ. विभा यादव, डॉ. संगीता शुक्ला, डॉ. सौरभ मिश्रा, डॉ. सुमित गुप्ता, अशोक तनेजा, सीताराम खत्री, प्रवीण सचदेवा, मीना श्रीवास्तव, सुधा श्रीवास्तव, रंजना सक्सेना, इंदु पाण्डेय, तरविंदर तथा स्पैड कोर ग्रुप के सदस्य गुलशन चावला, कुशवाहा जी, एस. के. श्रीवास्तव, ओम प्रकाश बदलानी और भोला नाथ सहित देशभर से आए प्रतिभागी मौजूद रहे।