कानपुर। भीतरगांव क्षेत्र के उमरी गांव में बुधवार देर रात दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहाँ एक लकवाग्रस्त किसान जलती हुई झोपड़ी के नीचे दबकर जीवित ही जल गया। घटना स्थल पर पहुंची पुलिस और ग्रामीण केवल जली हुई हड्डियां ही देख सके। साढ़ पुलिस, फायर ब्रिगेड और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की।
उमरी निवासी किसान अशोक सचान के ट्यूबवेल पर छप्पर की बनी झोपड़ी में गांव के ही 55 वर्षीय रज्जन विश्वकर्मा पिछले कई वर्षों से रहता था। तीन दिन पहले उसे फालिश का अटैक आया था, जिसके बाद वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गया था। घटना वाली रात वह अधिक शराब पिए हुए था, जिससे उसकी स्थिति और खराब थी।
जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात रज्जन ने ठंड से बचने के लिए झोपड़ी के अंदर ही अलाव जलाया और चारपाई पर लेट गया। कुछ देर बाद आग ने रजाई और छप्पर को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते पूरा छप्पर तेज़ लपटों के साथ नीचे गिर पड़ा, और लकवाग्रस्त रज्जन उठने में असमर्थ होने के कारण बुरी तरह आग की चपेट में आ गया।
ग्रामीण जब आग और धुएँ को देखकर मौके पर पहुँचे, तो झोपड़ी पूरी तरह जल चुकी थी। अंदर रज्जन का जला हुआ शव पड़ा मिला। ट्यूबवेल मालिक अशोक सचान ने तत्काल साढ़ पुलिस को सूचना दी।
साढ़ प्रभारी निरीक्षक अवनीश कुमार सिंह ने बताया कि फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाया और फॉरेंसिक टीम ने मौके से महत्वपूर्ण साक्ष्य इकट्ठे किए। जांच में सामने आया कि मृतक लंबे समय से शराब की लत का शिकार था। उसकी पत्नी और बेटी मुंबई में मायके रहती हैं, जबकि दो भाई कानपुर में रहकर प्राइवेट नौकरी करते हैं।
इस हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। पुलिस आगे की कार्यवाही में जुटी है।