कानपुर। नौबस्ता के बसंत विहार स्थित केस्को सबस्टेशन में बनाया गया हेल्प डेस्क काउंटर उपभोक्ताओं की सुविधा की जगह अब उनकी परेशानी का नया केंद्र बन गया है। शिकायत निपटान के नाम पर यहां इतनी अव्यवस्था फैली हुई है कि लोग घंटों भटकने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। हालत यह है कि शिकायत सुनने के लिए बनाए गए छह काउंटरों में से चार हमेशा बंद रहते हैं, दो ही काउंटर किसी तरह काम संभाल रहे हैं। नंबरिंग सिस्टम खराब होने से उपभोक्ता पहले नंबर, पहले सेवा के चक्कर में इधर-उधर भागते दिखते हैं।
चार बार चक्कर लगा चुके डॉक्टर भी हुए परेशान
कानपुर साउथ के एक वरिष्ठ डॉक्टर, जिन्होंने नाम प्रकाशित न करने की शर्त रखी, पिछले कई महीनों से मीटर अपडेट करवाने के लिए सबस्टेशन का चक्कर काट रहे हैं। उनके मुताबिक—
उन्होंने अपने घर पर सौर ऊर्जा सिस्टम लगवाया था, जिसके बाद नया मीटर लगा। कुछ ही दिनों में फिर डिजिटल मीटर लगा दिया गया। इसके बाद से मीटर अपडेट नहीं हुआ, जिसके चलते बिल प्रदर्शित नहीं हो रहा और जमा भी नहीं किया जा सकता।
डॉक्टर ने बताया कि हेल्प डेस्क काउंटर हर बार नई कहानी सुना देता है—“कंप्लेंट पड़ी है, सिस्टम अपडेट नहीं है, बिल मत जमा कीजिए, लाइट कट सकती है।”
सबसे बड़ी समस्या यह कि जब डॉक्टर घर पर थे, तो बिजली कटने के लिए कर्मचारी अचानक पहुंच गए। जब उन्हें पूरी बात समझाई गई, तब जाकर बिजली काटने से रुके।
उन्होंने कहा कि हेल्प डेस्क के कर्मचारी सिर्फ कंप्लेंट डाल देने का आश्वासन देकर उन्हें वापस भेज देते हैं। “कब समाधान होगा… किसी को नहीं पता। कई बार कंप्लेंट डाल दी गई है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।”
काउंटर तो बने, पर काम सिर्फ दो में
सबस्टेशन के अंदर हेल्प डेस्क पर कुल 6 काउंटर बने हैं, लेकिन मौके पर सिर्फ दो ही संचालित दिखे। बाकी सभी पर ताले लगे थे। सुबह से दोपहर तक उपभोक्ताओं की भारी भीड़ जमा रही, लेकिन नंबरिंग मशीन बंद होने की वजह से लोग अपनी बारी के लिए भिड़ते रहे।
एक उपभोक्ता ने कहा—“यहां सब कुछ दिखाने के लिए बना है। न नंबर चलता है, न शिकायतें सुनी जाती हैं। जो भी आता है, चक्कर काटता रहता है।”
“यहां कोई सुनने वाला नहीं” – उपभोक्ताओं की नाराजगी
हेल्प डेस्क पर बैठी उपभोक्ता पूनम अवस्थी ने बताया कि कई दिनों से बिजली बिल से जुड़ी समस्या लेकर आ रही हैं, पर समाधान कोई नहीं करता।
“किसे बताएं… किससे शिकायत करें? हर काउंटर पर अलग जवाब मिलता है। कोई कहता है इंतजार करो, कोई कहता है सिस्टम डाउन है।”
वहीं रामबाबू नामक उपभोक्ता ने आरोप लगाया—“खुले काउंटरों पर भी खानापूरी ही हो रही है। शिकायत लिखने के नाम पर नोट कर लेते हैं, लेकिन आगे किसी को भेजते नहीं।”
भीड़ और अफसरों की अनुपस्थिति से बढ़ रही दिक्कत
पूरे परिसर में एक भी जिम्मेदार अधिकारी उपभोक्ताओं से बातचीत करने या शिकायतें सुनने के लिए मौजूद नहीं मिला। कर्मचारी या तो फाइलों में उलझे रहे या “सिस्टम डाउन” का सहारा लेकर शिकायतें टालते दिखाई दिए।
उपभोक्ता एक-दूसरे से ही पूछते रहे कि किस काउंटर पर जाना है और कैसे समस्या का समाधान मिलेगा।
अंत में फिर खाली हाथ लौटे लोग
कई घंटों तक लाइन में लगे उपभोक्ताओं में से अधिकांश अपनी समस्या का समाधान कराए बिना लौट गए। डॉक्टर सहित कई लोग दोबारा आने को मजबूर हुए।