कानपुर,
“शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं, और जब इसमें रचनात्मकता शामिल हो जाती है, तो यह उस दुनिया को आकार देती है जिसका हम सपना देखते हैं।” इसी भावना को साकार करते हुए कैम्ब्रिज हाई स्कूल, सिविल लाइन्स में आज “उदगार” प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें छोटी कक्षाओं से लेकर वरिष्ठ छात्रों तक ने रचनात्मकता, विज्ञान, कला और नवाचार का उत्कृष्ट संगम प्रस्तुत किया।
प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रधानाचार्या एवं निदेशिका श्रीमती नीलम मल्होत्रा ने प्रधानाचार्या श्रीमती रुचि कोहली, उप-प्रधानाचार्या श्रीमती निधि मेहरोत्रा, श्रीमती सबा खान, तथा स्काईलार्क स्कूल की प्रधानाध्यापिका सुश्री धारण अरोड़ा की उपस्थिति में किया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के गायक मंडल द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई, जिसकी मधुर ध्वनि ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और प्रेरणादायी बना दिया।
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नन्हे कलाकारों की बड़ी कल्पनाएँ
प्री-स्कूल और प्री-प्राइमरी के बच्चों ने कठपुतली, संगीतमय बोतलें और पुनर्चक्रित सामग्री से बने सजावटी शिल्प प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। इन छोटे-छोटे हाथों की कलाकृतियों ने साबित किया कि कल्पनाशीलता की कोई उम्र नहीं होती।
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भाषाओं की दुनिया: हिंदी और अंग्रेजी विभाग का उत्कृष्ट प्रदर्शन
अंग्रेजी विभाग ने कला-एकीकृत शिक्षण परियोजनाओं के माध्यम से छात्रों की रचनात्मकता और समझ को प्रदर्शित किया। अंग्रेजी साहित्य के इतिहास को बताते हुए मैकबेथ, जूलियस सीज़र, द ग्रेट एक्सपेक्टेशंस जैसे नाटकों से प्रेरित प्रस्तुतियाँ बेहद सराही गईं। साथ ही छात्रों ने पज़ल्स और इंटरैक्टिव खेलों के माध्यम से गतिविधियों को रोचक बनाया।
हिंदी विभाग ने साहित्य और भाषा के विकास को दिखाने वाली प्रतियोगिताएँ आयोजित कीं। शब्द निर्माण, कहानी मंचन और विशेष रूप से प्रस्तुत ‘मुक्कड़ नाटक’ को अभूतपूर्व सराहना मिली।
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संगीत, नृत्य और नाट्य कला की मनमोहक प्रस्तुतियाँ
आरकेस्ट्रा विभाग ने मधुर वाद्य-यंत्रों की प्रस्तुति से माहौल को सुरमय कर दिया। प्रदर्शनों के दौरान “रुकुजेल”, “सिंड्रेला” जैसे नाटकों ने बच्चों की अभिनय प्रतिभा, हास्य, नवाचार और पर्यावरण-संदेश को प्रभावशाली तरीके से प्रदर्शित किया।
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विज्ञान के नए प्रयोग और मॉडल आकर्षण का केंद्र
विज्ञान विभाग ने अनेक आकर्षक कार्यशील मॉडल प्रस्तुत किए—
बायोगैस प्लांट
वॉटर टर्बाइन
लावा लैंप
जल संचयन प्रणाली
हाइड्रॉलिक ट्रैक
प्रदूषण-निरोधक मॉडल
परिवहन के साधन, विभिन्न प्रकार के घर
हाइड्रॉलिक ट्रैक और विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर आधारित मॉडल ने यह दर्शाया कि जल और गति ऊर्जा का उपयोग विद्युत उत्पादन में कैसे किया जा सकता है।
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समाज—संस्कृति और रचनात्मकता का सुंदर समन्वय
कक्षा तीन के विद्यार्थियों ने दिल्ली, राजस्थान, पंजाब और केरल की संस्कृति को परिधानों, भोजन, कलाकृतियों और जीवन शैली के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। यह रंग-बिरंगी प्रस्तुति अभिभावकों के आकर्षण का केंद्र बनी।
भावनात्मक और सामाजिक विषयों पर आधारित परियोजनाओं ने नवोदित वैज्ञानिकों, गणितज्ञों, लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कवियों के सपनों को भी स्वर दिया। प्रदर्शनी मानो एक ऐसे बहुरूपदर्शी संसार में प्रवेश करा रही थी जहाँ ज्ञान और अनुभव एक साथ चलते हैं।
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पाँच शैक्षणिक स्तंभों का अनूठा संगम
विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, गणित, भाषाएँ और कंप्यूटर विज्ञान—इन पाँच स्तंभों ने शिक्षा की एक सम्मोहक छवि प्रस्तुत की।
कंप्यूटर विभाग द्वारा बनाया गया एबेकस रोबोट, फैन्सी ड्रेस मॉडल्स, क्यूआर कोड मेकर, भाषा अनुवादक, और पर्यावरण आँकड़ा विश्लेषण जैसे प्रोजेक्ट आधुनिक तकनीक की उत्कृष्ट समझ को प्रदर्शित करते थे।
गणित विभाग ने गुणन चक्र, मिनियन्स पायरेट गेम और मैजिक स्क्वेयर मॉडल से सीखने की प्रक्रिया को मजेदार और आसान बनाया।
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भविष्य की कक्षा का मॉडल और नवाचार के नए आयाम
अभिभावक भी विभिन्न गतिविधियों में शामिल हुए और सहयोगात्मक “डेकोर डिलाइट” कला परियोजना में योगदान दिया। ऊर्जा-समाधानों, भविष्य की कक्षाओं के मॉडल और पर्यावरण-हितैषी शहरों की डिज़ाइन ने आगंतुकों को आने वाले कल की कल्पना करने के लिए प्रेरित किया।
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एक प्रदर्शनी नहीं—एक सीखने की यात्रा की शुरुआत
दिन के अंत में प्रदर्शनी केवल मॉडल्स का प्रदर्शन नहीं रही—यह सहयोग, जिज्ञासा और नवाचार का उत्सव बन गई। प्री-स्कूलर के हाथों से बने छोटे मिट्टी के जीवों से लेकर वरिष्ठ छात्रों द्वारा तैयार किए गए एआई-संचालित जटिल मॉडल तक, हर प्रस्तुति ने विद्यालय के शिक्षा-धर्म को मजबूत किया:
“एक स्थायी और उन्नत भविष्य का निर्माण।”
प्रधानाचार्या श्रीमती रुचि कोहली ने शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों की सराहना करते हुए कहा—
“यह प्रदर्शनी वैज्ञानिक सिद्धांतों, अवधारणाओं और प्रयोगों की यात्रा का समापन नहीं, बल्कि इसकी शुरुआत है। यह प्रक्रिया जीवन भर चलने वाली खोज का आधार बने, यही हमारी आशा है।”