कानपुर ।
विश्व जैव ईंधन दिवस के अवसर पर “जस्ट फॉर एनवायरनमेंट” संस्था ने रविवार को “वाहन प्रदूषण नियंत्रण में जैव ईंधन की भूमिका” विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। संस्था के संरक्षक प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या के चलते जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता और प्रदूषण दोनों बढ़ रहे हैं। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण से देश ने पिछले दस वर्षों में लगभग 1.36 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई है और 69.8 मिलियन मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन घटाया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में “कंप्रेस्ड बायोगैस” (CBG) और “सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल” जैसे विकल्प सड़क से लेकर विमानन क्षेत्र तक प्रदूषण कम करने में अहम साबित होंगे। भारत में विभिन्न स्रोतों से प्रतिवर्ष लगभग 620 लाख टन CBG उत्पादन की क्षमता है, जिससे अतिरिक्त 3700 लाख टन जैव-खाद भी तैयार होगी, जो किसानों के लिए लाभदायक होगी। सचिव जितेंद्र सिंह ने बताया कि 2030 तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 5% सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल मिश्रण का लक्ष्य तय किया गया है, जिसके लिए 70 करोड़ लीटर ईंधन की आवश्यकता होगी। भारतीय परिस्थितियों में यह ईंधन इथेनॉल से तैयार किया जा सकता है। कार्यक्रम में डॉ. जाहर सिंह, सुश्री काव्या अग्रवाल और अन्य सदस्यों ने “ग्रीन हाइड्रोजन” सहित अगली पीढ़ी के हरित ईंधनों पर अपने विचार रखे।
स्वच्छ ऊर्जा और प्रदूषण नियंत्रण में जैव ईंधन का बढ़ता महत्व