कानपुर।
एकनिष्ठ आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊॅंराम जी महाराज के 139 वें जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में पूरे विश्व में सभी छोटे बड़े शहरों में 37 दिन भारी उत्साह एवं खुशी के साथ मनाते हुए सत्संग का भजनों का आनन्द लेते हुए सहर्ष बीत गए 37 वें दिन मण्डल के हाजरा हजूर सद्गुरु स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज ने आचार्यश्री की एकनिष्ठता के सद्गुण को प्रकाशित करते हुए स्वरचित इस छन्द को गाकर सुनाते हुए सन्देश भेजा है *गीता जी का है ज्ञान ये – मन से मुझे भज सर्वदा, एक मुझ में मन लगा – कर भक्ति मेरी ही सदा, गीता जी के इस ज्ञान को – मन में बसा गुरु भक्ति की, हरि रूप गुरु को मानकर – गुरुदेव में अनुरक्ति की, रम रहे सब जगत में – गुरुदेव ही भगवान हैं, गुरुदेव टेऊॅंराम को – प्रणाम है ! प्रणाम है ।
*प्रातः आश्रम में ब्रह्मदर्शनी का पाठ किया गया संग ही उसके बाद आश्रम के बाहर सिंधी कड़ी चावल एवं शीतल पेय जल और मिल्क रोज का वितरण किया गया*
*आश्रम परिसर में आज शाम 6 बजे से भगवान हनुमान जी को याद करते हुए सुंदरकांड के पाठ का आयोजन किया ।। जिसमें आश्रम के व्यवस्थापक संत श्री भोलाराम ने बताया कि सुंदरकांड रामचरित मानस का हिस्सा है जो बजरंगबली हनुमानजी को समर्पित है। हिंदू धर्म में रामचरितमानस का विशेष महत्व है, और उसके सुंदरकांड अध्याय को अत्यंत शुभ और शक्तिशाली माना जाता है। सुंदरकांड श्रीराम कथा का वह भाग है जिसमें भगवान हनुमान की वीरता, भक्ति और बुद्धिमत्ता का अद्भुत वर्णन है। इस पाठ को नियमित रूप से पढ़ने से जीवन में कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं आध्यात्मिक, मानसिक, भावनात्मक और भौतिक रूप से। सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति का साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव भी कम हो जाता है।*
*संग ही स्वामी टेऊंराम महाराज जी के चालिहा महोत्सव के उपलक्ष में आश्रम में प्रेम प्रकाश मंडली द्वारा आयोजित महा कन्या भोज का आयोजन किया गया गया जिसमें 250 से अधिक कन्याओं का पूजन कर भंडारे का आयोजन किया साथ में विभिन्न प्रकार की वस्तुओं को अर्पण कर सभी से आशीर्वाद प्राप्त किया।।
*इस अवसर पर हेमंत सावलानी, मनीष पमनानी, दीपू जेठवानी, बॉबी रामचंदानी, लक्की सुखानी, सुरेश तलरेजा, अनिल तुलसानी, नरेश भगतानी , चिराग संतवानी , रौनक आडवाणी, विमल कालानी आदि मौजूद रहे।।