कानपुर-कानपुर के पारस हेल्थ के कैंसर विशेषज्ञों ने एक बड़ी मेडिकल सफलता हासिल की उन्होंने 60 साल के व्यक्ति के शरीर से 30×20 सेंटीमीटर आकार का और करीब 12 किलो वजन का ट्यूमर सुरक्षित रूप से निकाला यह जटिल सर्जरी तीन घंटे से ज्यादा चली, लेकिन बिना किसी परेशानी के पूरी हुई और पेट के सभी जरूरी अंग सुरक्षित रखे गए मरीज़ को पिछले छह साल से हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ थी पिछले छह महीनों से उसे पेट में सूजन और दर्द हो रहा था पूरी जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि उसके पेट के बाईं ओर एक बड़ा रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर है यह ट्यूमर पेट के बाएं हिस्से में फैला हुआ था और शरीर की मुख्य धमनी (एओर्टा) के बहुत पास था, जो काफी खतरे वाला था ट्यूमर शरीर के जरूरी अंगों के बहुत पास था, इसलिए सर्जरी के दौरान बाईं किडनी या आंतों के कुछ हिस्सों के नुकसान या उन्हें निकालने का खतरा था लेकिन सर्जरी टीम की कुशलता और सावधानी से पूरा ट्यूमर बिना किसी जरूरी अंग को नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रूप से हटा दिया गया यह सर्जरी अलग-अलग विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मिलकर की। टीम में डॉ. कुश पाठक, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. सत्यम् श्रीवास्तव, यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. अंबेश हेड, एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर, और डॉ. निरंजन सीनियर एनेस्थेटिस्ट शामिल थे डॉ. कुश पाठक एक सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट हैं उन्होंने बताया कि रेट्रोपेरिटोनियल जगह आंतों के पीछे एक बहुत ही पतली सी जगह होती है, इस जगह पर किडनी, पैंक्रियास और शरीर की मुख्य रक्त नलिकाएं होती हैं इस हिस्से में होने वाले ट्यूमर अक्सर शुरू में पता नहीं चलते और लक्षण दिखने से पहले बहुत बड़े हो जाते हैं ऐसे ट्यूमर को ठीक करने का एकमात्र तरीका सर्जरी होता है रेट्रोपेरिटोनियल सर्जरी बहुत चुनौतीपूर्ण होती है और ट्यूमर के पास के जरूरी अंगों को बिना नुकसान पहुंचाए हटाने के लिए बहुत ही कुशलता और सावधानी की जरूरत होती है डॉ. सत्यम श्रीवास्तव एक यूरो ऑन्कोलॉजिस्ट हैं उन्होंने इस केस के बारे में बताते हुए कहा कि हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती इतने बड़े ट्यूमर को बिना बाईं किडनी और आंतों को नुकसान पहुंचाए हटाना था बिना ज्यादा खून बहाए और बिना किसी अंग को चोट पहुंचाए बहुत सावधानी से ट्यूमर को अलग करते हुए हमने इसे सफलतापूर्वक निकाला सर्जरी के बाद सभी आसपास के अंग पूरी तरह सुरक्षित रहे एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर के प्रमुख डॉ. अंबेश ने इस केस के बारे में बताया कि इस तरह की बड़ी सर्जरी में मरीज़ की बॉडी और ब्लड प्रेशर की लगातार निगरानी ज़रूरी होती है सर्जरी के दौरान खून कम बहाने के लिए ब्लड प्रेशर को थोड़ा कम किया जाता है, लेकिन इस दौरान दिल और दिमाग जैसे जरूरी अंग सही तरह काम करते रहें, इसका खास ध्यान रखा जाता है क्रिटिकल केयर टीम सर्जरी के दौरान और उसके बाद हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहती है, जिससे मरीज़ की सुरक्षा और जल्दी ठीक होना सुनिश्चित हो सके मरीज़ की रिकवरी बिना किसी परेशानी के हुई और सर्जरी के पाँचवें दिन उन्हें स्वस्थ हालत में हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई
कानपुर-कानपुर के पारस हेल्थ के कैंसर विशेषज्ञों ने एक बड़ी मेडिकल सफलता हासिल की उन्होंने 60 साल के व्यक्ति के शरीर से 30×20 सेंटीमीटर आकार का और करीब 12 किलो वजन का ट्यूमर सुरक्षित रूप से निकाला यह जटिल सर्जरी तीन घंटे से ज्यादा चली, लेकिन बिना किसी परेशानी के पूरी हुई और पेट के सभी जरूरी अंग सुरक्षित रखे गए मरीज़ को पिछले छह साल से हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ थी पिछले छह महीनों से उसे पेट में सूजन और दर्द हो रहा था पूरी जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि उसके पेट के बाईं ओर एक बड़ा रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर है यह ट्यूमर पेट के बाएं हिस्से में फैला हुआ था और शरीर की मुख्य धमनी (एओर्टा) के बहुत पास था, जो काफी खतरे वाला था ट्यूमर शरीर के जरूरी अंगों के बहुत पास था, इसलिए सर्जरी के दौरान बाईं किडनी या आंतों के कुछ हिस्सों के नुकसान या उन्हें निकालने का खतरा था लेकिन सर्जरी टीम की कुशलता और सावधानी से पूरा ट्यूमर बिना किसी जरूरी अंग को नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रूप से हटा दिया गया यह सर्जरी अलग-अलग विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मिलकर की। टीम में डॉ. कुश पाठक, सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. सत्यम् श्रीवास्तव, यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट, डॉ. अंबेश हेड, एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर, और डॉ. निरंजन सीनियर एनेस्थेटिस्ट शामिल थे डॉ. कुश पाठक एक सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट हैं उन्होंने बताया कि रेट्रोपेरिटोनियल जगह आंतों के पीछे एक बहुत ही पतली सी जगह होती है, इस जगह पर किडनी, पैंक्रियास और शरीर की मुख्य रक्त नलिकाएं होती हैं इस हिस्से में होने वाले ट्यूमर अक्सर शुरू में पता नहीं चलते और लक्षण दिखने से पहले बहुत बड़े हो जाते हैं ऐसे ट्यूमर को ठीक करने का एकमात्र तरीका सर्जरी होता है रेट्रोपेरिटोनियल सर्जरी बहुत चुनौतीपूर्ण होती है और ट्यूमर के पास के जरूरी अंगों को बिना नुकसान पहुंचाए हटाने के लिए बहुत ही कुशलता और सावधानी की जरूरत होती है डॉ. सत्यम श्रीवास्तव एक यूरो ऑन्कोलॉजिस्ट हैं उन्होंने इस केस के बारे में बताते हुए कहा कि हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती इतने बड़े ट्यूमर को बिना बाईं किडनी और आंतों को नुकसान पहुंचाए हटाना था बिना ज्यादा खून बहाए और बिना किसी अंग को चोट पहुंचाए बहुत सावधानी से ट्यूमर को अलग करते हुए हमने इसे सफलतापूर्वक निकाला सर्जरी के बाद सभी आसपास के अंग पूरी तरह सुरक्षित रहे एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर के प्रमुख डॉ. अंबेश ने इस केस के बारे में बताया कि इस तरह की बड़ी सर्जरी में मरीज़ की बॉडी और ब्लड प्रेशर की लगातार निगरानी ज़रूरी होती है सर्जरी के दौरान खून कम बहाने के लिए ब्लड प्रेशर को थोड़ा कम किया जाता है, लेकिन इस दौरान दिल और दिमाग जैसे जरूरी अंग सही तरह काम करते रहें, इसका खास ध्यान रखा जाता है क्रिटिकल केयर टीम सर्जरी के दौरान और उसके बाद हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहती है, जिससे मरीज़ की सुरक्षा और जल्दी ठीक होना सुनिश्चित हो सके मरीज़ की रिकवरी बिना किसी परेशानी के हुई और सर्जरी के पाँचवें दिन उन्हें स्वस्थ हालत में हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।