कानपुर, भारतवर्ष की इतिहास गाथा उन दिव्य विभूतियों से सुशोभित है, जिन्होंने अपने त्याग, तपस्या, न्यायप्रियता और लोकसेवा से न केवल समाज को दिशा दी, बल्कि काल की सीमाओं को पार करते हुए युगों तक प्रेरणा का स्रोत बनी रहीं। ऐसी ही एक विलक्षण विभूति थीं लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर, जिनका जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित धर्म, सेवा, न्याय और जनकल्याण का जीवंत आदर्श रहा। आज जब हम 21वीं सदी के भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को देखते हैं, तो उनकी कार्यशैली में बार-बार अहिल्याबाई होल्कर की उस प्राचीन परंपरा की झलक दिखाई देती है जहाँ सत्ता नहीं, सेवा प्राथमिक उद्देश्य होता है जहाँ विकास का मार्ग संस्कृति से होकर गुजरता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सम्पूर्ण शासनदर्शन “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के सिद्धांत पर आधारित है। उनकी सोच और योजनाओं में देश के अंतिम पंक्ति के नागरिक की चिंता दिखाई देती है ठीक उसी तरह जैसे अहिल्याबाई ने अपने राज्य में हर वर्ग, हर जाति, हर स्त्री-पुरुष को न्याय और गरिमा का जीवन प्रदान किया। मोदी की जनधन योजना ने करोड़ों गरीबों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा, उज्ज्वला योजना ने रसोई में गैस चूल्हा पहुँचा कर महिलाओं को सम्मानित जीवन दिया आयुष्मान भारत योजना ने करोड़ों को स्वास्थ्य सुरक्षा दी, तो स्वच्छ भारत मिशन ने हर गली-मोहल्ले को स्वच्छता की नई चेतना से जोड़ा। ये सभी योजनाएं केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण के वाहक हैं।मोदी के नेतृत्व की खूबी यह है कि वह निर्णय लेने में दृढ़, परंतु जनता के प्रति संवेदनशील हैं। उनकी कार्यशैली में आधुनिक प्रबंधन और प्राचीन भारतीय मूल्यों का अद्भुत समन्वय दिखता है। हम ऐसी महान विभूति अहिल्याबाई होल्कर को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं, जिन्होंने हमें सिखाया कि सत्ता का सर्वोच्च स्वरूप सेवा होता है। उनके सिद्धांत और जीवन आज भी हमारे लिए प्रकाशस्तंभ हैं। अहिल्याबाई को कोटिशः नमन! और उन सभी नेतृत्वकर्ताओं को वंदन, जो भारत को उसकी सनातन आत्मा के साथ विश्वगुरु बनाने के संकल्प में जुटे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रेरणा: धर्म, सेवा और राष्ट्रनिर्माण का समन्वय