कानपुर, ओ बी सी चेयरमैन हंसराज अहीर से मिलकर राष्ट्रिय पिछड़ा वर्ग संघ यूथ के राष्ट्रीय महासचिव सुनील यादव ने कानपुर आईआईटी में कैंपस प्लेसमेंट के दौरान पिछले सत्रों में कुछ कंपनियों द्वारा छात्रों से उनकी जातीय पृष्ठभूमि/कैटिगरी या संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) में प्राप्त रैंक पूछने की जानकारी दी!सुनील यादव ने आशंका जताई थी कि इस डेटा का इस्तेमाल प्लेसमेंट प्रक्रिया के दौरान और संभवत: बाद में कार्यस्थल पर उनके साथ भेदभाव करने के लिए किया जा सकता है। इस सत्र में दुबारा जाति पूछने वाली त्रुटि की आशंका पर उप श्री बृजभूषण को ज्ञापन आईआईटी कानपुर में दिया था ।आईआईटी में कैंपस प्लेसमेंट साक्षात्कार आयोजित करने वाली पिछले सत्र में कुछ कंपनियों ने छात्रों से उनकी जातीय पृष्ठभूमि या तीन साल पहले संयुक्त प्रवेश परीक्षा में प्राप्त रैंक का उल्लेख करने के लिए कहा है, इस सत्र में भी जिसको लेकर भेदभाव का डर है। यह डेटा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के करिअर के लिए संभावित जोखिमपूर्ण हो सकता है!सुनील यादव ने बताया एससी/ एसटी/ओबीसी जेईई रैंक से उनके संभावित नियोक्ताओं को पता चल जाएगा कि उन्होंने आरक्षित श्रेणियों में आईआईटी में प्रवेश प्राप्त किया है, जिनके कट-ऑफ अंक सामान्य श्रेणी के छात्रों की तुलना में कम हैं। सुनील यादव ने आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहीर जी को बताया कि निदेशक आईआईटी से ज्ञापन के माध्यम से बताया कि आई आई टी कानपुर प्रशाशन यह सुनिश्चित करे की कोई भी कंपनी छात्रों को उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि या जेईई रैंक का खुलासा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती है, यह कैसे पता चलेगा कि डेटा लीक या इसका दुरुपयोग नहीं होगा?’आईआईटी निदेशक कानपुर से पूछा की यह किसके दबाव में हो रहा है!ज्ञापन देने वालो में मुख्यत दिलीप कृष्णा,ओसान सिंह आदि मौजूद रहे।
आई आई टी कानपुर में कैंपस प्लेसमेंट में जाति पूछने की शिकायत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग में करी