विलादते इमाम हुसैन खानकाहे हुसैनी में परम्परागत ढंग से मनाया गया

कानपुर 03 फरवरी खानकाहे हुसैनी के ज़ेरे एहतिमाम पैगम्बर ए इस्लाम के नवासे, मौला अली के शाहबज़ादे, शहीद ए आज़म हज़रत इमाम हुसैन की यौम ए विलादत पर जशन ए इमाम हुसैन परम्परागत ढंग से सदभाव भाईचारे शान ओ शौकत अकीदत के साथ खानकाहे हुसैनी हज़रत ख्वाजा सैय्यद दाता हसन सालार शाह (रह० अलै०) कर्नलगंज में मनाया गया।जशन ए इमाम हुसैन की शुरुआत हाफिज मोहम्मद कफील हुसैन ने तिलावते कुरान पाक से की। शोरा ए कराम ने नात मनकबत पेश की जिसमे अर्श वालों के घर चरागां है सहन-ए ज़हरा में नूर छाया है क्योंकि तकमील-ए पंजतन करने मेरा मौला हुसैन आया है। दुनिया हुसैन की है ज़माना हुसैन का, है आरज़ू वहा भी मिले दर हुसैन का।दुआ मे खादिम खानकाहे हुसैनी इखलाक अहमद चिश्ती ने अल्लाह की बारगाह मे मदीने वाले आक़ा इमाम हुसैन के सदके मे हम सबको हज़रत इमाम हुसैन के बताये रास्तो पर चलने, भूखों को खाना खिलाने, गरीबों की मदद करने का जज़्बा कायम होने, दुनिया व मुल्क मे कुदरत के कहर से बचाने, हमारे मुल्क मे अमनो अमान कायम कर उसे तरक्की देने, कुंभ हादसे में घायलों को सेहत देने, व हादसे में मरने वालों के परिवार को सब्र देने की दुआ की। दुआ के बाद खानकाहे हुसैनी के बाहर राहगीरों को लंगर – मिष्ठान वितरण किया गया।
जशन मे इखलाक अहमद चिश्ती, हाफिज़ मोहम्मद कफील हुसैन, परवेज़ आलम वारसी, हाजी गौस रब्बानी, फाजिल चिश्ती, अबरार अहमद वारसी, मोहम्मद फैज़ान अज़हरी, मोहम्मद हफीज़ चिश्ती, जावेद आलम कादरी, मोहम्मद रज़ा कादरी, मोहम्मद राहिल, मोहम्मद मुबीन खाँ, मोहम्मद अदनान खाँ, कारी अब्दुल हसीब नूरी, ज़ुबैर खान, ज़ियाउद्दीन खान,आफताब आलम, मोहम्मद ज़ुबैर, एजाज़ अहमद, खादिम खानकाहे हुसैनी अफ़ज़ाल अहमद आदि मुख्य थे।

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