स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से फिर उजागर, जांच के नाम पर खानापूर्ति

कानपुर। कानपुर में स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही अब जानलेवा बनती जा रही है। पिछले दिनों में जिले में मेडिकल नेग्लिजेंस के 6 बड़े मामले सामने आए हैं। कहीं ऑपरेशन के बाद महिला के पेट में तौलिया छोड़ दिया गया, कहीं ड्राइवर मरीजों को दवा लिख रहा है, तो कहीं नवजात की मौत पर परिजनों ने हंगामा काटा। हर मामले में सीएमओ ने जांच कमेटी तो बना दी, लेकिन ठोस कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है।
केस-1: पेट में तौलिया कांड – अभी भी जांच में उलझा
4 महीने पहले मकसूदाबाद के ओमशांति हॉस्पिटल के संचालक ने एक 24 वर्षीय महिला सोनी का ऑपरेशन कल्याणपुर के विश्वास हॉस्पिटल की किराए की ओटी में कराया था। आरोप है कि सर्जरी के दौरान पेट में तौलिया छूट गई। महिला 4 महीने दर्द से तड़पती रही, मवाद निकलता रहा। 12 अक्टूबर को अकबरपुर में दूसरी सर्जरी में तौलिया निकला। सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने 3 सदस्यीय टीम बनाई है। हॉस्पिटल संचालक कह रहा है – “मैंने तो सिर्फ 4 हजार में ओटी किराए पर दी थी।” अब सवाल उठ रहा है कि क्या प्राइवेट हॉस्पिटल बिना लाइसेंस के ओटी किराए पर दे सकते हैं।
केस-2: होमगार्ड भर्ती में मेडिकल के नाम पर 50 हजार की वसूली – नया खुलासा
यह सबसे ताजा मामला है। कानपुर पुलिस लाइन में 15 अक्टूबर से होमगार्ड भर्ती का मेडिकल चल रहा था। आरोप है कि डॉ. प्रवीण और डॉ. महेश द्विवेदी नाक टेढ़ी, हड्डी निकली बताकर अभ्यर्थियों को फेल कर रहे थे और पास कराने के लिए 20 से 50 हजार तक मांग रहे थे। हंगामे के बाद 2 डॉक्टर और ड्राइवर अजीत हिरासत में लिए गए। गिरफ्तार होने से बचने के लिए दोनों डॉक्टरों ने उर्सला अस्पताल में हार्ट अटैक और स्पाइनल प्रॉब्लम का नाटक किया। कार्डियोलॉजी जांच में दोनों फिट निकले और देर रात 18 अक्टूबर को जेल भेज दिए गए। पुलिस को 22 अभ्यर्थियों से 3 लाख की UPI ट्रांजेक्शन के सबूत मिले हैं। एलआईयू की 32 पन्नों की रिपोर्ट पहले ही बता चुकी थी कि सीएमओ दफ्तर में सालों से फिट-अनफिट का खेल चल रहा है।
केस-3 और 4: केपीएस और रुद्रा अस्पताल – अवैध ICU सील
कल्याणपुर के रुद्रा अस्पताल में 5 अक्टूबर को घायल युवक प्रांशु (25) की मौत के बाद परिजनों और अस्पताल स्टाफ में पथराव हो गया, 8 लोग घायल हुए। परिजनों का आरोप – डॉक्टरों ने 3 लाख लेकर भी सही इलाज नहीं किया। चकेरी के केपीएस अस्पताल में भी ICU में मौत पर लापरवाही का आरोप लगा। जांच में केपीएस का ICU अवैध मिला, उसे सील कर दिया गया है। दोनों अस्पतालों की जांच के लिए सीएमओ ने नई कमेटी बनाई है।

केस 5: नौबस्ता में 2.25 लाख लेकर भी नहीं बचा सके नवजात
12 अक्टूबर को नौबस्ता के आत्माराम चाइल्ड केयर अस्पताल में एक नवजात बच्ची की मौत हो गई। पिता अमन गुप्ता का आरोप है कि अस्पताल ने इलाज के नाम पर 2.25 लाख रुपये वसूल लिए और लापरवाही बरती। परिजनों ने थाने में शिकायत दी, पुलिस ने सीएमओ को जांच के लिए पत्र लिखा है।

केस-6: कांशीराम अस्पताल में ड्राइवर बना डॉक्टर, जिंदा मरीज को मृत घोषित किया
कांशीराम अस्पताल में इमरजेंसी डॉक्टर रामकेश कोर्ट में थे, तभी उनका ड्राइवर देव OPD में बैठकर मरीज देखता और पर्ची लिखता पकड़ा गया। वीडियो वायरल होने पर 3 सदस्यीय कमेटी बनी। वहीं एलएलआर अस्पताल में जिंदा मरीज विनोद को कागजों में मृत दिखा दिया गया और पुलिस पोस्टमार्टम के लिए शव लेने आ गई, तब जिंदा मिला। 3 स्टाफ सस्पेंड हुए।

सिस्टम पर सवाल
कानपुर में हर लापरवाही के बाद सिर्फ जांच कमेटी बनती है। चाहे ओटी किराए पर देने का मामला हो, ड्राइवर के डॉक्टर बनने का हो या फिट-अनफिट के नाम पर वसूली का। जनता पूछ रही है – कार्रवाई कब होगी।

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