कानपुर। श्री छावनी रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला महोत्सव में प्रभु श्रीराम के वनवास प्रसंग से जुड़ी विभिन्न लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। केवट संवाद, चित्रकूट विश्राम, सुमंत लीला, दशरथ मरण, भरत मिलाप (जयंत लीला), पंचवटी विश्राम एवं सुपर्णखा नक्कटी लीला के मंचन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
केवट संवाद में प्रभु श्रीराम और केवट के बीच श्रद्धा, समर्पण एवं निष्काम भक्ति का सुंदर चित्रण किया गया। चित्रकूट विश्राम और सुमंत लीला के माध्यम से वनवास की परिस्थितियों तथा अयोध्या से जुड़े भावनात्मक प्रसंगों को प्रस्तुत किया गया। वहीं, श्रीराम के वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने के प्रसंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया। भरत मिलाप एवं जयंत लीला के माध्यम से रामकथा के आदर्शों और धर्म की महत्ता को दर्शाया गया।
पंचवटी विश्राम लीला में प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वन जीवन का चित्रण किया गया। इसके बाद सुपर्णखा नक्कटी लीला में सुपर्णखा के पंचवटी पहुंचने, श्रीराम के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखने और लक्ष्मण द्वारा उसके प्रस्ताव को अस्वीकार करने के प्रसंग का मंचन हुआ। माता सीता को नुकसान पहुंचाने के प्रयास पर लक्ष्मण द्वारा सुपर्णखा की नाक काटने के दृश्य को कलाकारों ने प्रभावशाली संवादों और सजीव अभिनय से प्रस्तुत किया। यह प्रसंग आगे रावण के प्रतिशोध और माता सीता के हरण की पृष्ठभूमि बनता है।
लीलाओं के माध्यम से धर्म, मर्यादा और आदर्श आचरण का संदेश दिया गया। कमेटी ने श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आगामी लीलाओं में शामिल होने की अपील की।इस अवसर पर सिद्धार्थ काशीवार, लखन लाल ओमर, अजय गुप्ता राजू, जय कुमार प्रजापति, अजय प्रकाश तिवारी, राम शंकर वर्मा, आनंद गुप्ता, दीपक कसेरा, रचित यादव, मुकुल साहू, कृष्ण मोहन शुक्ला, लकी शर्मा, गोविंद गुप्ता, खालिद रशीद, वीरू मिश्रा, हर्ष यादव, शिवम सविता, नीतीश पाठक गोलू, वैभव चौहान आदि उपस्थित रहे।
छावनी रामलीला में भावपूर्ण मंचन