अस्पताल प्रबंधन का दावा- मरीज की हालत गंभीर थी, दोनों किडनी फेल होने की जानकारी परिजनों को दी गई थी
कानपुर। बर्रा स्थित शिवाजी अस्पताल में महिला मरीज संगीता यादव की मौत के बाद हुए हंगामे और तोड़फोड़ के मामले में अस्पताल के जनरल फिजिशियन डॉ. कृष्णा पांडे ने प्रेसवार्ता कर अस्पताल का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि संगीता यादव को गंभीर हालत में अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था। परिजनों ने बताया था कि मरीज का पूर्व में कल्याणपुर स्थित एक अस्पताल में उपचार कराया गया था। डॉ. कृष्णा पांडे के अनुसार, अस्पताल पहुंचने पर मरीज के परिजनों से पूर्व उपचार से संबंधित दस्तावेज, डिस्चार्ज पेपर, ट्रांसफर लेटर और उपचार की चार्टिंग मांगी गई, लेकिन उस समय कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया। परिजनों ने सुबह दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात कही थी।
अस्पताल पक्ष के मुताबिक, इमरजेंसी में मरीज की जांच की गई। डॉ. भारद्वाज ने मरीज को अटेंड किया। उस समय मरीज का ब्लड प्रेशर और पल्स बेहद कम थी। हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने मरीज की जांच की। चिकित्सकों के अनुसार मरीज को सांस लेने में परेशानी हो रही थी और उसकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी थीं।
डॉ. कृष्णा पांडे ने बताया कि मरीज के परिजनों को उसकी गंभीर स्थिति और चिकित्सकों की ओर से दी गई जानकारी से अवगत कराया गया था। अस्पताल का दावा है कि चिकित्सकों और कर्मचारियों ने मरीज को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन उसकी हालत लगातार गंभीर बनी रही और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों द्वारा अस्पताल में हंगामा और तोड़फोड़ करने तथा कर्मचारियों के साथ मारपीट करने का भी अस्पताल पक्ष ने आरोप लगाया। डॉ. पांडे ने कहा कि चिकित्सकों पर लापरवाही के आरोप लगाए गए, जबकि अस्पताल का दावा है कि डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ मरीज की लगातार निगरानी कर रहे थे और अपनी ओर से पूरा उपचार उपलब्ध कराया गया।