सीएसजेएमयू का 41वाँ दीक्षांत समारोह: मेधावियों ने लहराया परचम, बेटियों का रहा दबदबा

1.07 लाख से अधिक उपाधियां वितरित, 96 पदक मेधावियों को मिले, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने हस्तलेखन, जल संरक्षण, एचपीवी टीकाकरण, स्वच्छ परिसर, डिजिटल डिग्री, मोबाइल मेडिकल वैन और कौशल विकास पर दिए अहम निर्देश

कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) का 41वाँ दीक्षांत समारोह गुरुवार को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में शिक्षा, शोध, नवाचार और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम देखने को मिला। मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात शिल्पाचार्य एवं उद्यमी अंचल पी. बिजलानी को कला, संस्कृति और समाज के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डी.लिट. की उपाधि प्रदान की गई।
समारोह से पहले राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित स्टार्टअप एक्सपो का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न नवाचारों की जानकारी ली, पांच विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया तथा दस नई परियोजनाओं का शिलान्यास कर विश्वविद्यालय की विकास यात्रा को नई गति देने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए स्टार्टअप मॉडल और नवाचारों की सराहना करते हुए उन्हें आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
इस वर्ष विश्वविद्यालय ने कुल 1,07,713 उपाधियां प्रदान कीं। दीक्षांत समारोह में मेधावी विद्यार्थियों का विशेष सम्मान किया गया। कुल 51 मेधावी विद्यार्थियों को 96 पदक प्रदान किए गए, जिनमें 42 छात्राएं और केवल 9 छात्र शामिल रहे। एक बार फिर छात्राओं ने अपनी प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रदर्शन से सभी का ध्यान आकर्षित किया। वहीं 92 शोधार्थियों को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की गई, जिनमें 50 महिला और 42 पुरुष शोधार्थी शामिल रहे। समारोह में उपस्थित विद्यार्थियों और अभिभावकों ने मेधावियों का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।
दीक्षांत समारोह को सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ते हुए विश्वविद्यालय ने कई जनकल्याणकारी पहल भी कीं। कानपुर नगर के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 300 तथा कानपुर देहात के लिए 200, कुल 500 विशेष आंगनबाड़ी किट वितरित की गईं। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों की बेटियों सहित 800 बालिकाओं का गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण कराया गया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि प्रदेश में अब तक 62 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाया जा चुका है और अधिकारियों को निर्देश दिए कि एक वर्ष के भीतर एचपीवी टीकाकरण का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा किया जाए।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने विद्यार्थियों को जीवन में अनुशासन, मेहनत और उत्कृष्टता अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सुंदर हस्तलेखन केवल परीक्षा में अधिक अंक दिलाने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व की पहचान भी है। उन्होंने प्रत्येक जिले में हस्तलेखन प्रतियोगिताएं आयोजित कराने और जिन बच्चों की लिखावट कमजोर है उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर बल दिया।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि डिग्रियों को डिजिटल लॉकर पर उपलब्ध कराना सराहनीय पहल है, लेकिन यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अधिक से अधिक विद्यार्थी उनका उपयोग करें। इसके लिए नियमित रूप से डाउनलोड का डेटा तैयार किया जाए और उसकी समीक्षा भी की जाए।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को मोबाइल मेडिकल वैन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों और परिसर में अध्ययनरत विद्यार्थियों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, आधुनिक भवनों के निर्माण, छात्रावासों की स्वच्छता और विश्वविद्यालय परिसरों को सुंदर एवं व्यवस्थित बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने घोषणा की कि विश्वविद्यालय परिसरों की स्वच्छता और सौंदर्यीकरण को लेकर प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी तथा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालय को राजभवन की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
राज्यपाल ने राजभवन सचिवालय की निरीक्षण टीम द्वारा बताई गई कमियों को शीघ्र दूर करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने परिसर में बिजली की अनावश्यक खपत रोकने, छात्रावासों और मेस में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने तथा पूरे परिसर को पूर्णतः नशामुक्त बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों ने किसी कारणवश पढ़ाई बीच में छोड़ दी है, उन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जाए। साथ ही अशिक्षित महिलाओं को साक्षर बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने की भी आवश्यकता है।
समारोह के दौरान स्कूली बच्चों ने जल संरक्षण पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति दी, जिसकी राज्यपाल ने मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि पानी का संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और सभी को गिलास में उतना ही पानी लेना चाहिए, जितनी आवश्यकता हो। उन्होंने कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को विद्यालयों की प्रार्थना सभा, सांस्कृतिक गतिविधियों और नैतिक शिक्षा से नियमित रूप से जोड़ने की भी बात कही।
इस अवसर पर राज्यपाल ने ऑनलाइन माध्यम से ‘सस्टेनेबिलिटी डैशबोर्ड’ तथा ‘नेवर अलोन ऐप’ का शुभारंभ किया। विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया तथा उनकी पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स और खेलो इंडिया गेम्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के समापन पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान उत्साह, गरिमा और उपलब्धियों का वातावरण बना रहा तथा मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान के साथ शिक्षा, नवाचार, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक दायित्वों का सशक्त संदेश भी दिया गया।

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