अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था पर सख्ती, पुलिस आयुक्त ने दिए कड़े निर्देश

कानपुर। पुलिस आयुक्त कार्यालय सभागार में पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल की अध्यक्षता में जून माह की मासिक अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर पुलिस आयुक्त (मुख्यालय/अपराध) संकल्प शर्मा, सभी पुलिस उपायुक्त, अपर पुलिस उपायुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त, थाना प्रभारी, संयुक्त निदेशक अभियोजन, क्षेत्रीय परिवहन विभाग, आबकारी विभाग तथा अग्निशमन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, लंबित विवेचनाओं, साइबर अपराध, न्यायालय संबंधी प्रकरणों तथा विभिन्न विभागों के साथ समन्वय की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
पुलिस आयुक्त ने ‘यक्ष ऐप’ के प्रभावी संचालन पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिए कि सभी थानों में अपराधियों का सत्यापन, डोजियर तैयार करना तथा बीट संबंधी सूचनाओं का समयबद्ध अंकन सुनिश्चित किया जाए। जिन थानों में बीट संबंधी प्रविष्टियां कम पाई गईं, उनमें रेउना, हरबंशमोहाल, नजीराबाद और रायपुरवा सहित अन्य थानों को तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऐप की निगरानी पुलिस महानिदेशक स्तर से की जा रही है, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में गैंगस्टर अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमों की समीक्षा करते हुए पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिए कि सभी विवेचनाएं छह माह के भीतर पूरी कर आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किए जाएं। विशेष परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी मामले में एक वर्ष से अधिक की देरी स्वीकार नहीं होगी। वहीं जेल प्रशासन ने बताया कि वर्तमान में 14 संवेदनशील बंदियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है तथा उनकी सुरक्षित पेशी के लिए पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जा रहा है।
अग्निशमन विभाग की समीक्षा के दौरान बताया गया कि विभिन्न संस्थानों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है तथा तीन दिवसीय अग्नि सुरक्षा अभियान चलाकर लोगों को आग से बचाव और आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। इस पर पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिए कि जिन संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की कमी मिले, उन्हें नोटिस देकर निर्धारित समय में सुधार कराया जाए। समयसीमा के भीतर सुधार नहीं होने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अपराध समीक्षा के दौरान शस्त्र अधिनियम और एनडीपीएस एक्ट के तहत की जा रही कार्रवाई की धीमी प्रगति पर पुलिस आयुक्त ने नाराजगी जताई। बाबूपुरवा, साढ़, चमनगंज और किदवई नगर सहित संबंधित थानों को चेतावनी देते हुए मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए लगातार विशेष अभियान चलाने और निवारक कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग और शासन स्तर पर लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए उन्होंने सभी लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण कराने के निर्देश दिए। साथ ही उच्च न्यायालय से संबंधित लंबित प्रतिशपथ पत्रों को समय से दाखिल करने के लिए सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
विवेचनाओं की समीक्षा के दौरान बिठूर, बिल्हौर, अरौल, साढ़ और चौबेपुर सहित अन्य थानों में लंबित मामलों के शीघ्र अनावरण के निर्देश दिए गए। वहीं साइबर अपराधों की समीक्षा करते हुए कहा गया कि पात्र मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए तथा साइबर ठगी से संबंधित मामलों में बैंक खातों को शीघ्र फ्रीज कर पीड़ितों की धनराशि वापस दिलाने के लिए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्र के पैरोकारों के साथ नियमित बैठक करें तथा न्यायालय से जमानत पर छूटने वाले अपराधियों और उनके जमानतदारों की जानकारी एकत्र कर आवश्यक निगरानी रखें। आगामी शैक्षणिक सत्र को देखते हुए स्कूल और कॉलेजों के आसपास छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, एंटी रोमियो टीमों की सक्रियता बढ़ाने तथा संवेदनशील स्थानों पर नियमित गश्त करने के भी निर्देश दिए गए।
पुलिस आयुक्त ने सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीकर हुड़दंग करने की शिकायतों पर भी सख्ती दिखाई। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि शराब की दुकानें निर्धारित समय के अनुसार ही संचालित हों और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि मिलने पर संबंधित थाना प्रभारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
बैठक के अंत में पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने कहा कि सभी थानों पर उपलब्ध जनशक्ति और संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाए। प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी स्पष्ट हो तथा उसकी नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने चौकी प्रभारियों की कार्यप्रणाली पर प्रभावी नियंत्रण रखने, जनशिकायतों का निष्पक्ष एवं समयबद्ध निस्तारण करने, आमजन के साथ शालीन एवं संवेदनशील व्यवहार बनाए रखने तथा बड़े आयोजनों, मेलों और कानून-व्यवस्था की दृष्टि से संवेदनशील अवसरों पर ड्रोन तकनीक का उपयोग कर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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