कानपुर। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) आयोग के सदस्य रमेश चंद्र कुंडे सोमवार को कानपुर पहुंचे, जहां उन्होंने सर्किट हाउस में प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर दलित समाज के कल्याण, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ हर हाल में पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
समीक्षा बैठक के साथ ही आयोग के सदस्य ने सर्किट हाउस में जनसुनवाई भी की। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने दलित उत्पीड़न, मारपीट, हत्या, दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म, छेड़छाड़, भूमि विवाद और अन्य मामलों से संबंधित शिकायतें आयोग के समक्ष रखीं। पीड़ितों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए रमेश चंद्र कुंडे ने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज से जुड़े मामलों में शिकायत मिलने पर किसी भी प्रकार की देरी न की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए तथा पीड़ितों को समयबद्ध न्याय दिलाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
जनसुनवाई के बाद आयोग के सदस्य ने काकादेव, गूदड़ बस्ती तथा चुन्नीगंज स्थित भगवतदास घाट की दलित बस्तियों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बस्तियों की बदहाल स्थिति देखकर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने पाया कि कई स्थानों पर सीवर लाइनें पूरी तरह चोक थीं, मैनहोल खुले पड़े थे या क्षतिग्रस्त थे। नालियों की नियमित सफाई नहीं हो रही थी, खड़ंजों की हालत बेहद खराब थी और जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ था। कई स्थानों पर जलभराव की समस्या भी देखने को मिली। इसके अलावा बस्तियों में पेयजल संकट भी सामने आया, जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों ने आयोग के सदस्य को बताया कि नगर निगम की ओर से पर्याप्त सफाई कर्मचारी नहीं लगाए जा रहे हैं, जिसके कारण नियमित सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित है। लोगों ने पेयजल, सीवर, नालियों और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं से भी उन्हें अवगत कराया। शिकायतें सुनने के बाद रमेश चंद्र कुंडे ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि यह अत्यंत विडंबनापूर्ण स्थिति है कि जिन सफाई कर्मचारियों के परिवार दिन-रात मेहनत कर पूरे कानपुर शहर को स्वच्छ रखने का कार्य करते हैं, उन्हीं की बस्तियां गंदगी, बदहाल सीवर व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती। सरकार गरीबों, वंचितों और दलित समाज के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रमेश चंद्र कुंडे ने नगर निगम प्रशासन को एक महीने का सख्त अल्टीमेटम देते हुए निर्देश दिए कि दलित बस्तियों में सफाई कर्मचारियों की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित की जाए। साथ ही सीवर लाइन, नालियों, खड़ंजों, पेयजल व्यवस्था और नियमित साफ-सफाई की सभी समस्याओं का एक माह के भीतर स्थायी समाधान किया जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा में व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हुईं तो नगर निगम की लापरवाही और कार्यप्रणाली को सार्वजनिक किया जाएगा तथा इसकी जानकारी शासन स्तर तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सर्किट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक में जिले के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें डीसीपी (पूर्वी), एडिशनल डीसीपी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), क्षेत्रीय प्रबंधक परिवहन, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ), जल निगम, जलकल विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा दलित समाज से संबंधित समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
दलित बस्तियों की बदहाली पर आयोग सख्त