कानपुर। प्री-मानसून की पहली ही बारिश ने नगर निगम और जिला प्रशासन के जलभराव से निपटने के दावों की पोल खोल दी। शहर का संवेदनशील माना जाने वाला जूही खलवा पुल शनिवार को पूरी तरह जलमग्न हो गया, जिसके बाद प्रशासन को सुरक्षा के मद्देनजर पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता बंद करना पड़ा।
पुल बंद होने से आसपास के इलाकों में यातायात व्यवस्था चरमरा गई और वैकल्पिक मार्गों पर घंटों जाम की स्थिति बनी रही। जलभराव के चलते राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर वर्ष जलभराव से निपटने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन हालात में कोई बदलाव नहीं आता। आधुनिक पंपिंग स्टेशन और नालों की सफाई के दावे पहली ही बारिश में फेल साबित हो गए।
क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि मेट्रो निर्माण कार्य के चलते पहले से प्रभावित ड्रेनेज व्यवस्था को समय रहते दुरुस्त नहीं किया गया। साथ ही नालों की सिल्ट सफाई भी प्रभावी ढंग से नहीं कराई गई, जिसके कारण बारिश का पानी पुल के नीचे जमा हो गया।
लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन स्थायी समाधान निकालने के बजाय हर बार बैरिकेडिंग लगाकर जिम्मेदारी से बच निकलता है। जलभराव के कारण सड़क के गड्ढे पानी में छिप गए हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह तो अभी प्री-मानसून की शुरुआत है। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो मानसून के दौरान हालात और गंभीर हो सकते हैं। लोगों ने नगर आयुक्त और जिला प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है।
पहली बारिश में डूबा जूही खलवा पुल, नगर निगम के दावों की खुली पोल