भीषण गर्मी में कानपुर सेंट्रल पर पानी का संकट, बूंद-बूंद को तरसे यात्री

सूखी पड़ी टोटियां और खराब वॉटर कूलर बने मुसीबत, खौलता पानी पीने को मजबूर मुसाफिर

कानपुर-उत्तर भारत में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी और तपती धूप के बीच कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को भारी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है। स्टेशन पर पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्लेटफॉर्मों पर लगी कई पानी की टोटियां पूरी तरह सूखी और बंद पड़ी हैं, जबकि जिन स्थानों पर पानी उपलब्ध है वहां वॉटर कूलर खराब होने के कारण यात्रियों को खौलता हुआ गर्म पानी मिल रहा है। ऐसे में भीषण गर्मी में सफर कर रहे मुसाफिरों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। उत्तर भारत के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में गिने जाने वाले कानपुर सेंट्रल से रोजाना सैकड़ों ट्रेनें गुजरती हैं और लाखों यात्री यहां से सफर करते हैं। नौतपा और उमस भरी गर्मी के इस दौर में यात्रियों को सबसे अधिक जरूरत ठंडे और साफ पानी की होती है, लेकिन स्टेशन पर हालात इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रहे हैं। मुसाफिर एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक पानी की तलाश में भटकते दिखाई दे रहे हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के साथ यात्रा कर रहे परिवारों को उठानी पड़ रही है। यात्रियों का आरोप है कि स्टेशन पर लगे अधिकांश वॉटर कूलर केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। कई जगहों पर पानी की टोटियां सूखी पड़ी हैं, जबकि कुछ स्थानों पर पाइप से इतना गर्म पानी निकल रहा है कि उससे हाथ धोना भी मुश्किल हो रहा है।
यात्रियों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें बार-बार बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है। स्टेशन परिसर में मौजूद स्टॉलों पर पानी की बोतल खरीदने वालों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए हर सफर में महंगी पानी की बोतलें खरीदना जेब पर अतिरिक्त बोझ बनता जा रहा है।
एक यात्री ने नाराजगी जताते हुए कहा, “प्लेटफॉर्म पर उतरते ही पानी की तलाश की, लेकिन कूलर बंद पड़ा था। जहां पानी मिल रहा था वहां गर्म पानी आ रहा था। इतनी गर्मी में ठंडा पानी भी न मिले तो यात्रियों की हालत खराब हो जाती है। आखिर रेलवे यात्रियों की बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान क्यों नहीं दे रहा?”
वहीं इस पूरे मामले पर रेलवे प्रशासन का कहना है कि स्टेशन पर यात्रियों के लिए पानी की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। अधिकारियों के मुताबिक यदि कहीं तकनीकी खराबी या वॉटर कूलर बंद होने की समस्या है तो उसे जल्द ठीक कराया जाएगा। प्रशासन का दावा है कि मैकेनिकों की टीम को निर्देश दिए गए हैं और खराब पड़े कूलरों को दुरुस्त कराया जा रहा है।
हालांकि रेलवे प्रशासन के दावों और स्टेशन की जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर साफ दिखाई दे रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब मार्च और अप्रैल से ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे तो रेलवे ने पहले से पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए। हर साल भीषण गर्मी में पानी की किल्लत और खराब वॉटर कूलरों की समस्या सामने आती है, लेकिन इसके बावजूद स्थाई समाधान नहीं निकल पा रहा है।
यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि प्लेटफॉर्मों पर बंद पड़े वॉटर कूलरों और सूखी टोटियों को तत्काल दुरुस्त कराया जाए, ताकि भीषण गर्मी में सफर कर रहे लोगों को राहत मिल सके और उन्हें बुनियादी सुविधा के लिए परेशान न होना पड़े।

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