विश्व स्किजोफ्रेनिया दिवस पर आईएमए कानपुर ने मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता का दिया संदेश

कानपुर। Indian Medical Association की कानपुर शाखा द्वारा “विश्व स्किजोफ्रेनिया दिवस – मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सामाजिक सहयोग का आह्वान” विषय पर रविवार 24 मई 2026 को दोपहर 12 बजे आईएमए कॉन्फ्रेंस हॉल, टेम्पल ऑफ सर्विस, 37/7 परेड कानपुर में एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में मानसिक रोगों विशेषकर स्किजोफ्रेनिया के प्रति जागरूकता बढ़ाना, भ्रांतियों को दूर करना तथा मानसिक रोगियों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना रहा।
पत्रकार वार्ता को आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, वैज्ञानिक सब कमेटी के चेयरमैन डॉ. ए.सी. अग्रवाल, उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. मनीष निगम, वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. गणेश शंकर, वित्त सचिव डॉ. विशाल सिंह तथा वैज्ञानिक सचिव डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से जागरूक एवं सहयोगात्मक रवैया अपनाने की अपील की।
विशेषज्ञों ने बताया कि प्रति वर्ष 24 मई को विश्व स्तर पर “विश्व स्किजोफ्रेनिया जागरूकता दिवस” मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य स्किजोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना और मरीजों को सामाजिक समर्थन उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि स्किजोफ्रेनिया एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से प्रबंधनीय मानसिक विकार है, जो व्यक्ति की सोचने, महसूस करने, व्यवहार करने तथा वास्तविकता को समझने की क्षमता को प्रभावित करता है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में लाखों लोग स्किजोफ्रेनिया से प्रभावित हैं और भारत में भी इसकी संख्या लगातार बढ़ रही है। दुर्भाग्यवश जानकारी के अभाव और सामाजिक भ्रांतियों के कारण अधिकांश मरीज उपेक्षा, भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार का सामना करते हैं, जिससे उनकी स्थिति और अधिक जटिल हो जाती है। मनोचिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि स्किजोफ्रेनिया कोई “दोहरी व्यक्तित्व” (Split Personality) की बीमारी नहीं है और न ही यह लाइलाज रोग है। समय पर पहचान, नियमित दवाओं, मनोचिकित्सा, पारिवारिक सहयोग और पुनर्वास सेवाओं की सहायता से मरीज सामान्य, सम्मानजनक और उत्पादक जीवन जी सकते हैं। उन्होंने कहा कि मरीजों के प्रति सहानुभूति, सहयोग और सकारात्मक व्यवहार ही उनके उपचार की सबसे बड़ी शक्ति है।
विशेषज्ञों ने स्किजोफ्रेनिया के प्रमुख लक्षणों की जानकारी देते हुए बताया कि भ्रम होना, अवास्तविक आवाजें सुनाई देना, लोगों से दूरी बनाना, अत्यधिक संदेह करना तथा असामान्य व्यवहार इस बीमारी के सामान्य संकेत हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत किसी योग्य मनोचिकित्सक या न्यूरो-साइकिएट्रिस्ट से परामर्श लेना चाहिए ताकि बीमारी का समय रहते उपचार शुरू किया जा सके।
पत्रकार वार्ता में यह भी बताया गया कि भारत सरकार राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) एवं आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है।
विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक रोगों को लेकर समाज में व्याप्त डर और कलंक को समाप्त करना समय की आवश्यकता है। परिवार का भावनात्मक सहयोग मरीजों के उपचार में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। यदि समाज संवेदनशीलता और सहयोग की भावना के साथ आगे आए तो स्किजोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्ति भी सामान्य जीवन जी सकते हैं।
अंत में आईएमए कानपुर ने आमजन से अपील की कि मानसिक रोगों को शर्म या कलंक का विषय न मानें, बल्कि जरूरतमंद लोगों को उपचार हेतु प्रेरित करें। मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है और इसके प्रति जागरूक होना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
“समझ, सहयोग और समय पर उपचार — स्किजोफ्रेनिया से लड़ाई का सबसे बड़ा आधार।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

नमस्कार,J news India में आपका हार्दिक अभिनंदन हैं, यहां आपकों 24×7 के तर्ज पर पल-पल की अपडेट खबरों की जानकारी से रूबरू कराया जाएगा,खबर और विज्ञापन के लिए संपर्क करें- +91 9044953076,हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें साथ ही फेसबुक पेज को लाइक अवश्य करें।धन्यवाद