कानपुर:
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार की उच्चस्तरीय टीम ने बुधवार को कल्याणपुर के सुरार स्थित निर्माणाधीन ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट फॉर स्पीच एंड हियरिंग (एआईएसएच) परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने भवन निर्माण की प्रगति, दिव्यांगजन के लिए विकसित की जा रही सुविधाओं तथा संस्थान में भविष्य में उपलब्ध होने वाली स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के लिए पहुंचे भारत सरकार के ज्वाइंट सेक्रेटरी सौरभ जैन और डिप्टी सेक्रेटरी नवीन अग्रवाल ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, समयसीमा और सुविधाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। इस दौरान एआईएसएच की निदेशक पुष्पावती, डॉ. अजीश इब्राहिम, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी सदर अनुभव जैन, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी विनय उत्तम, डिप्टी सीएमओ डॉ. कैलाश चंद्र तथा कार्यदायी संस्था नेशनल प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनपीसीसी) के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
निरीक्षण के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में ज्वाइंट सेक्रेटरी सौरभ जैन ने कार्यदायी संस्था एनपीसीसी को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि परियोजना का कार्य हर हाल में जुलाई 2026 तक पूरा किया जाए ताकि संस्थान जल्द से जल्द आमजन के लिए शुरू किया जा सके। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न करने की बात भी कही।
बैठक में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि भवन पूरी तरह दिव्यांगजन हितैषी बनाया जाए। अधिकारियों ने निर्देश दिए कि संस्थान में व्हीलचेयर फ्रेंडली रैंप, विशेष शौचालय, लिफ्ट, सुगम मार्ग, संकेतक बोर्ड और अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं तय मानकों के अनुरूप विकसित की जाएं। जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी को भवन की सुगम्यता संबंधी विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
डिप्टी सीएमओ डॉ. कैलाश चंद्र को निर्देशित किया गया कि जनपद के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से अधिक से अधिक मरीजों को एआईएसएच में रेफर किया जाए। साथ ही आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से संस्थान की सेवाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया, ताकि श्रवण एवं वाक संबंधी समस्याओं से जूझ रहे बच्चों और दिव्यांगजन को समय पर बेहतर उपचार और प्रशिक्षण मिल सके।
अधिकारियों ने कहा कि एआईएसएच के शुरू होने से कानपुर समेत आसपास के जिलों के हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में ऐसे मरीजों को इलाज और विशेष प्रशिक्षण के लिए दूसरे राज्यों या बड़े संस्थानों का रुख करना पड़ता है। संस्थान के शुरू होने के बाद प्रदेश में श्रवण एवं वाक विकार से संबंधित आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और बेहतर पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
एआईएसएच भवन निर्माण में तेजी लाने के निर्देश, केंद्रीय टीम ने किया निरीक्षण