नवजात शिशुओं की जान बचाने के लिए बेसिक रिससिटेशन तकनीकों का दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण
नवजात शिशुओं की सुरक्षा पर दिया गया जोर
कानपुर। राष्ट्रीय NRP दिवस के अवसर पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग द्वारा बेसिक Neonatal Resuscitation Program (NRP) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को कम करना और जन्म के तुरंत बाद उत्पन्न होने वाली आपात स्थितियों से निपटने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करना रहा।
150 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, इंटर्न और स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को नवजात शिशुओं के पुनर्जीवन से जुड़ी आवश्यक तकनीकों का सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
व्यावहारिक प्रशिक्षण पर रहा विशेष फोकस
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने नवजात शिशुओं की प्रारंभिक देखभाल, श्वास संबंधी सहायता, बैग एवं मास्क वेंटिलेशन तथा बेसिक रिससिटेशन तकनीकों का डेमो देकर प्रतिभागियों को अभ्यास कराया। प्रशिक्षकों ने बताया कि जन्म के बाद शुरुआती कुछ मिनट नवजात शिशु के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और सही समय पर दी गई चिकित्सकीय सहायता उसकी जान बचा सकती है।
समय पर प्रशिक्षण से बचाई जा सकती है जान
कार्यक्रम में बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र गौतम ने कहा कि समय पर और सही तरीके से दिया गया NRP प्रशिक्षण नवजात शिशुओं के जीवन को बचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि देश में नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम बेहद आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों का नियमित प्रशिक्षण जरूरी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव
कार्यक्रम का संचालन कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. यशवंत राव के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर Dr. Devina, Dr. Amitesh, Dr. Bidisha, Dr. Rahul सहित अन्य फैकल्टी सदस्यों ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रदान किया। विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए नवजात शिशुओं की देखभाल में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की।
प्रतिभागियों ने सीखे महत्वपूर्ण कौशल
प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और नवजात शिशुओं की देखभाल से जुड़े महत्वपूर्ण कौशलों का अभ्यास किया। स्वास्थ्यकर्मियों ने माना कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में बेहतर कार्य करने के लिए आत्मविश्वास प्रदान करते हैं।
जागरूकता बढ़ाने का दिया संदेश
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए निरंतर प्रशिक्षण और जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।