कानपुर—शहर की पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए अब तक के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक का खुलासा किया है। करीब ₹125 करोड़ की ठगी को अंजाम देने वाले इस संगठित नेटवर्क के 8 शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि इस पूरे खेल में प्रतिष्ठित बैंकों के कुछ कर्मचारी भी शामिल थे, जो मोटे कमीशन के लालच में फर्जी खातों को खुलवाने और ट्रांजैक्शन लिमिट बढ़ाने में मदद कर रहे थे।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी फर्मों का रजिस्ट्रेशन कराता था और उन्हीं के नाम पर करंट अकाउंट खुलवाकर ठगी की रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करता था। गिरोह के तार ‘डिजिटल अरेस्ट’, ‘इन्वेस्टमेंट फ्रॉड’ और ‘बैंकिंग फ्रॉड’ जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े पाए गए हैं। महज 14 दिनों के भीतर करीब 90 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं, जबकि पूरे नेटवर्क के माध्यम से अब तक ₹125 करोड़ की रकम खपाई जा चुकी है।
जांच में Axis Bank, UCO Bank और UP Gramin Bank के कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि ये कर्मचारी फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर खाते खोलने और उनकी लेनदेन सीमा बढ़ाने में गिरोह की मदद करते थे। इसके बदले में वे ठगी की रकम का 5 से 10 प्रतिशत तक कमीशन लेते थे।
पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से 9 स्मार्टफोन बरामद किए हैं, जिनमें ठगी से जुड़े साक्ष्य और बैंकिंग एप्लिकेशन मौजूद हैं। इसके अलावा फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल खातों और फर्मों के निर्माण में किया जाता था। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह है, जो बैंकिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर देशव्यापी स्तर पर साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता को बेहद गंभीर मानते हुए उनके खिलाफ भी कठोरतम कार्रवाई की जा रही है।
कानपुर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या संदिग्ध कॉल मिलने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। समय रहते सूचना देने से ठगी गई राशि को फ्रीज कर वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।
कानपुर में ₹125 करोड़ का साइबर ठगी रैकेट बेनकाब