कानपुर। विश्व ऑटिज्म जागरूकता माह के अंतर्गत बाल रोग अकादमी, कानपुर द्वारा कैंट स्थित प्रेरणा स्पेशल स्कूल में एक गरिमामय एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों ने अपनी अद्वितीय प्रतिभा और व्यावसायिक कौशल का प्रदर्शन कर यह संदेश दिया कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर वे समाज की मुख्यधारा से किसी भी रूप में पीछे नहीं हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या शिखा अग्रवाल द्वारा अतिथियों के स्वागत के साथ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से बाल रोग अकादमी कानपुर के अध्यक्ष डॉ. जे.के. गुप्ता, सचिव डॉ. शैलेंद्र गौतम तथा अजय खन्ना उपस्थित रहे।
बच्चों ने किया कौशल और आत्मनिर्भरता का शानदार प्रदर्शन
इस विशेष आयोजन में बच्चों ने अपने व्यावसायिक प्रशिक्षण के तहत सीखे गए विभिन्न कौशलों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उन्होंने फोटोकॉपी करना, लिफाफे तैयार करना, मोमबत्ती एवं धूपबत्ती निर्माण जैसे तकनीकी व रचनात्मक कार्य प्रस्तुत किए। इसके अलावा बच्चों ने बागवानी, चाय एवं कॉफी तैयार करने जैसे दैनिक जीवन कौशलों का भी सजीव प्रदर्शन कर सभी को प्रभावित किया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने सुरीले गीत गाकर और वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति देकर उपस्थित अतिथियों और अभिभावकों को भावविभोर कर दिया। पूरे सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।
ऑटिज्म पर विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण राय
इस अवसर पर डॉ. जे.के. गुप्ता ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं बल्कि एक न्यूरो-डेवलपमेंटल स्थिति है। उन्होंने कहा कि समय रहते पहचान और प्रारंभिक हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक है। यदि बच्चों को सही प्रशिक्षण और व्यावसायिक कौशल विकास दिया जाए तो वे आत्मनिर्भर बनकर सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज को इन बच्चों के प्रति दया नहीं बल्कि अवसर और सहयोग की भावना रखनी चाहिए।
समाज की सोच बदलने की पहल
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में ऑटिज्म के प्रति जागरूकता फैलाना और सोच में सकारात्मक बदलाव लाना रहा। वक्ताओं ने कहा कि हर बच्चे में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है, जरूरत केवल उसे पहचानने और सही दिशा देने की है।
अंत में सभी अतिथियों ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और प्रेरणा स्पेशल स्कूल तथा बाल रोग अकादमी कानपुर के प्रयासों की सराहना की।