कानपुर के काकादेव स्थित पुरानी बस्ती के मां दुर्गा मंदिर पार्क में आयोजित भव्य शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। ‘ॐ’ और शिवलिंग की महिमा से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा और सैकड़ों श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए उमड़ पड़े।
कथा व्यास आचार्य योगेश अवस्थी ने भगवान शिव की महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुए कलयुग में धर्म और दान के महत्व को सरल शब्दों में समझाया।
कलयुग में दान ही धर्म का आधार
आचार्य योगेश अवस्थी ने कहा कि कलयुग में धर्म की तीन टांगें समाप्त हो चुकी हैं और अब केवल दान ही धर्म का मुख्य आधार बचा है। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा—
“येन केन विधि दीन्हे दान करै कल्यान”
अर्थात किसी भी प्रकार से किया गया दान मनुष्य का कल्याण करता है।
उन्होंने यह भी बताया कि सच्चा दान वही है, जो किसी जरूरतमंद को उसकी आवश्यकता की वस्तु देकर किया जाए—इसे ही ‘महादान’ कहा गया है।
‘ॐ’ और शिवलिंग की दिव्य उत्पत्ति
कथा का मुख्य केंद्र भगवान शिव के स्वरूप और ‘ॐ’ की उत्पत्ति रही। आचार्य ने बताया कि भगवान शिव के पांच मुखों से ‘ॐ’ की उत्पत्ति हुई, जिससे आगे चलकर ‘ॐ नमः शिवाय’ पंचाक्षरी मंत्र प्रकट हुआ।
इसी मंत्र से त्रिपदा गायत्री और फिर चारों वेदों का प्राकट्य हुआ, जो संपूर्ण सृष्टि का आधार माने जाते हैं।
📿 मंत्र जप से मिलती है विशेष कृपा
कथा के दौरान भगवान शिव और भगवान विष्णु के संवाद का प्रसंग सुनाते हुए बताया गया कि जो भक्त ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करता है, वह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है—यहां तक कि पुत्र कार्तिकेय से भी अधिक।
यह सुनते ही पूरा पांडाल ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने लिया कथा का आनंद
दूसरे दिन क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का रसपान किया। आरती के बाद सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर प्रभा त्रिवेदी, ज्योति त्रिवेदी, डाली, सरिता, रेनू, प्रेम बाबू अग्निहोत्री, धीरज अग्निहोत्री, बबलू मिश्रा सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर यह आयोजन काकादेव क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का केंद्र बना हुआ है।