चारागाह की 10 करोड़ की जमीन कब्जामुक्त

कानपुर। जनपद में भूमाफियाओं और अवैध कब्जेदारों के खिलाफ प्रशासन की सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में मंगलवार को घाटमपुर तहसील क्षेत्र में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चारागाह की बेशकीमती जमीन को कब्जामुक्त करा दिया। जिलाधिकारी के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में तहसील प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई से भूमाफियाओं और अवैध कब्जेदारों में हड़कंप मच गया।
मामला घाटमपुर तहसील क्षेत्र का है, जहां नवेली पावर प्लांट के सामने कानपुर–हमीरपुर हाईवे के किनारे स्थित चारागाह की जमीन पर अवैध कब्जा कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। राजस्व विभाग की जांच में सामने आया कि लगभग 56 बिस्वा (0.5600 हेक्टेयर) पशुचर भूमि पर अवैध निर्माण कर लिया गया था। प्रशासन के अनुसार इस जमीन की बाजार कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये आंकी गई है।
बताया गया कि राजस्व अभिलेखों में गाटा संख्या 349 ख (0.3826 हेक्टेयर) और गाटा संख्या 350 (1.6800 हेक्टेयर) को पशुचर यानी चारागाह की भूमि के रूप में दर्ज किया गया है। इस भूमि का उपयोग ग्रामसभा के पशुओं और गौवंशों के चारे के लिए आरक्षित है। आरोप है कि कोयला नगर निवासी राजवीर सिंह पुत्र संतोष सिंह और उनके परिवार के लोगों ने इस भूमि के करीब 56 बिस्वा हिस्से पर अवैध कब्जा कर लिया था।
कब्जेदारों ने इस भूमि पर कालिंदी होटल के नाम से भवन निर्माण कर लिया था और वहां होटल लॉन, सड़क, पार्किंग तथा अन्य जनसुविधाएं विकसित कर दी थीं। इतना ही नहीं, चारागाह की भूमि को खुदवाकर उसे पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग में लाया जा रहा था। इससे ग्रामसभा की आरक्षित भूमि का स्वरूप ही बदल दिया गया था।
राजस्व विभाग के अधिकारियों ने पहले भी कई बार मौके का निरीक्षण कर निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों ने कब्जेदारों को चेतावनी दी थी कि वह तत्काल अवैध निर्माण हटाकर भूमि खाली कर दें, लेकिन इसके बावजूद कब्जेदारों ने निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए निर्माण कार्य जारी रखा और सार्वजनिक उपयोग की भूमि को निजी व्यवसाय में बदल दिया।
शनिवार को क्षेत्र के भ्रमण के दौरान उपजिलाधिकारी घाटमपुर अबिचल प्रताप सिंह ने स्वयं मौके पर पहुंचकर होटल संचालक को अवैध कब्जा हटाने की सख्त चेतावनी दी थी। इसके बावजूद होटल संचालक ने स्वेच्छा से कब्जा हटाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। सोमवार को भी राजस्व टीम मौके पर पहुंची और होटल मालिक की मौजूदगी में कब्जा हटाने को कहा गया, लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद मंगलवार की सुबह प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम के साथ मौके पर पहुंचकर बुलडोजर से अवैध निर्माण को ध्वस्त करना शुरू कर दिया। कार्रवाई के दौरान होटल परिसर में बने अवैध निर्माण, लॉन और अन्य संरचनाओं को हटाकर भूमि को कब्जामुक्त कराया गया।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान होटल प्रबंधन की ओर से विरोध भी किया गया। मौके पर मौजूद होटल मैनेजर ने प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध करने की कोशिश की, जिस पर पुलिस ने तत्काल उसे हिरासत में ले लिया। बाद में उसे संबंधित धाराओं में कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया गया। प्रशासन ने कब्जेदारों के खिलाफ आगे की विधिक कार्रवाई भी शुरू कर दी है।
यह पूरी कार्रवाई उपजिलाधिकारी घाटमपुर अबिचल प्रताप सिंह के नेतृत्व में की गई। मौके पर तहसीलदार अंकिता पाठक, नायब तहसीलदार धर्मेंद्र चौधरी, राजस्व निरीक्षक इंद्र कुमार तथा लेखपाल शीलेश भारती और रविंद्र तिवारी सहित राजस्व विभाग की टीम मौजूद रही। वहीं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए थाना सजेती की पुलिस फोर्स चौकी प्रभारी नैवेली अनुराग सिंह के नेतृत्व में तैनात रही।
कब्जामुक्त कराई गई भूमि को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने मौके पर ही ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव की मौजूदगी में सूचना बोर्ड भी लगवाया। साथ ही भूमि पर हरे चारे की बुआई कराई गई, ताकि भविष्य में इस जमीन का उपयोग गौवंशों के चारे के लिए किया जा सके और ग्रामसभा की इस आरक्षित भूमि का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
उपजिलाधिकारी घाटमपुर अबिचल प्रताप सिंह ने बताया कि शासन की मंशा और जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देश हैं कि सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित शासकीय भूमि को भूमाफियाओं और लैंड ग्रैबर्स के कब्जे से मुक्त कराया जाए। उन्होंने कहा कि जनपद में ऐसे लोगों की पहचान कर लगातार अभियान चलाया जा रहा है और जहां भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा मिलेगा, वहां इसी तरह सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई अवैध कब्जेदारों के लिए स्पष्ट चेतावनी है कि वे स्वेच्छा से शासकीय भूमि खाली कर दें, अन्यथा उनके विरुद्ध कठोर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य सार्वजनिक उपयोग की जमीन को सुरक्षित रखना और उसे जनहित से जुड़ी योजनाओं तथा ग्रामसभा के उपयोग में लाना है।
तहसीलदार अंकिता पाठक ने बताया कि पशुचर भूमि आरक्षित श्रेणी की भूमि होती है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से गौआश्रय स्थलों और ग्रामसभा के गोवंशों के लिए चारा उत्पादन में किया जाता है। इस भूमि पर किसी भी व्यक्ति को निजी या व्यावसायिक उपयोग का अधिकार नहीं है। इसलिए ग्रामसभा की इस जमीन को कब्जामुक्त कराकर पुनः उसके मूल उद्देश्य के लिए सुरक्षित किया गया है।
उन्होंने बताया कि तहसील क्षेत्र में सरकारी और ग्रामसभा की भूमि पर अवैध कब्जों की सूची तैयार की जा रही है। जहां-जहां भी ऐसे मामले सामने आएंगे, वहां प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करेगी और भूमि को कब्जामुक्त कराया जाएगा।
प्रशासन की इस कार्रवाई को स्थानीय लोगों ने भी सराहा है। ग्रामीणों का कहना है कि चारागाह की भूमि पर अवैध कब्जा होने से गांव के पशुओं के लिए चारे की समस्या बढ़ रही थी। अब प्रशासन की कार्रवाई से उम्मीद जगी है कि ग्रामसभा की जमीन सुरक्षित रहेगी और उसका उपयोग गांव और पशुओं के हित में किया जा सकेगा।

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