कानपुर। औद्योगिक नगरी कानपुर के लिए विकास और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। स्थानीय सांसद Ramesh Awasthi के निरंतर प्रयासों से शहर को दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं की सौगात मिली है। इन पहलों से जहां एक ओर कानपुर के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर गंगा नदी की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। केंद्र सरकार ने शहर के 14 प्रमुख नालों की टैपिंग के लिए 138.11 करोड़ रुपये की राशि मंजूर कर दी है। इसके साथ ही वाराणसी से कानपुर तक राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के विस्तार की दिशा में भी पहल शुरू हो गई है।
सांसद रमेश अवस्थी ने इस संबंध में प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय जहाजरानी मंत्री Sarbananda Sonowal के समक्ष वाराणसी से कानपुर तक राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (एनडब्ल्यू-1) के विस्तार का प्रस्ताव रखा है। वर्तमान में यह जलमार्ग वाराणसी से कोलकाता तक संचालित है। यदि इसका विस्तार कानपुर तक होता है तो लगभग 200 किलोमीटर की अतिरिक्त जलमार्ग सुविधा विकसित होगी, जिससे कानपुर सहित आसपास के कई शहरों को सीधा लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार जलमार्ग विस्तार का सबसे बड़ा लाभ औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगा। कानपुर का चमड़ा उद्योग, जिसका वार्षिक निर्यात लगभग 6,000 करोड़ रुपये है, उसे सस्ता और सुगम परिवहन माध्यम प्राप्त होगा। इसके अलावा वस्त्र उद्योग, जिसका सालाना कारोबार लगभग 200 करोड़ रुपये के आसपास है, उसे भी इस परियोजना से नई गति मिलेगी। जलमार्ग के माध्यम से माल ढुलाई सस्ती होने से उद्योगों की लागत में कमी आएगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।
अनुमान है कि इस परियोजना के लागू होने के बाद क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा और क्षेत्रीय जीडीपी में लगभग 4,000 करोड़ रुपये तक की वृद्धि संभव है। इसके साथ ही करीब 8,360 से 10,480 तक नए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
जलमार्ग विस्तार का एक और महत्वपूर्ण लाभ ऊर्जा क्षेत्र को भी मिलेगा। घाटमपुर और पनकी स्थित थर्मल पावर प्लांटों के लिए कोयले की आपूर्ति यदि जलमार्ग के जरिए होती है तो इसकी लागत में लगभग 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इससे बिजली उत्पादन की लागत कम होगी और ऊर्जा क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण है, क्योंकि जलमार्ग के उपयोग से हर वर्ष लगभग 2 से 3 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।
इसी के साथ गंगा नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने ‘नमामि गंगे’ अभियान के तहत कानपुर के 14 प्रमुख नालों की टैपिंग के लिए 138.11 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत अब इन नालों का गंदा पानी सीधे गंगा या अन्य नदियों में नहीं गिरेगा। इसके बजाय पाइपलाइन के माध्यम से इस अपशिष्ट जल को सीधे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाया जाएगा, जहां उसे शुद्ध किया जाएगा।
इस परियोजना से न केवल गंगा नदी में गिरने वाले प्रदूषण में कमी आएगी बल्कि नदी की जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को भी संरक्षण मिलेगा। लंबे समय से गंगा में गिरने वाले नालों के कारण प्रदूषण की समस्या बनी हुई थी, जिसे दूर करने के लिए यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलमार्ग विस्तार और नालों की टैपिंग जैसी परियोजनाएं कानपुर को आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टियों से सशक्त बनाएंगी। इससे शहर को स्वच्छ और आधुनिक औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
सांसद रमेश अवस्थी के इन प्रयासों को शहर के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। शहर के उद्योगपतियों, व्यापारियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने इन परियोजनाओं के लिए सांसद का आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि इन योजनाओं के धरातल पर उतरने से कानपुर आने वाले वर्षों में देश के विकसित और स्वच्छ औद्योगिक शहरों की श्रेणी में शामिल हो सकेगा।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जलमार्ग परियोजना और नमामि गंगे के तहत नालों की टैपिंग का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा होता है, तो इससे न केवल व्यापार और उद्योग को नई दिशा मिलेगी बल्कि गंगा की स्वच्छता और शहर के पर्यावरण में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
कानपुर को विकास की दोहरी सौगात