कानपुर—दक्षिण क्षेत्र के केशव नगर स्थित 100 बेड का सरकारी अस्पताल बनकर तैयार होने के बावजूद अब तक चालू न हो पाने से जनता में रोष बढ़ता जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल के मुख्य द्वार पर बैठकर सद्बुद्धि यज्ञ किया। इस दौरान मौके पर पहुंची पुलिस ने हवन सामग्री छीन ली, जिससे सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हो गई।
जानकारी के अनुसार, करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से बना यह 100 बेड का नया सरकारी अस्पताल एक साल से अधिक समय से बनकर तैयार खड़ा है। इसके बावजूद न तो यहां इलाज शुरू हो सका है, न ही डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की तैनाती हुई है और न ही जरूरी चिकित्सीय उपकरण लगाए गए हैं। बताया गया कि अस्पताल को चालू करने के लिए मार्च 2025 की तारीख तय की गई थी, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी अस्पताल शुरू नहीं हो सका।
इसी के विरोध में सपा के पार्षद अर्पित यादव के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता अस्पताल के गेट पर पहुंचे और प्रदर्शन शुरू किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सद्बुद्धि यज्ञ किया, ताकि शासन-प्रशासन को “सद्बुद्धि” आए और अस्पताल शीघ्र शुरू हो सके। इसी बीच पुलिस मौके पर पहुंची और यज्ञ कर रहे कार्यकर्ताओं से हवन सामग्री तथा जलते हवन कुंड को हटाने का प्रयास किया। इससे माहौल गरमा गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई।
सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि अस्पताल मार्च 2025 से पूरी तरह तैयार है और उसी समय इसे चालू हो जाना चाहिए था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि अस्पताल को चालू कराने की मांग समय-समय पर उठती रही है। महेश त्रिवेदी और रमेश अवस्थी द्वारा भी कई बार अस्पताल का निरीक्षण किया गया, फिर भी अस्पताल चालू नहीं हो सका।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर अस्पताल बना है, उसी के पास भाजपा का क्षेत्रीय कार्यालय भी स्थित है। दोनों का निर्माण कार्य लगभग एक साथ शुरू हुआ था, लेकिन भाजपा कार्यालय बनकर चालू हो गया, जबकि अस्पताल आज भी बंद पड़ा है। इससे लोगों में असंतोष और बढ़ गया है। लोगों का आरोप है कि यदि अस्पताल शुरू हो जाता, तो दक्षिण कानपुर के हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलती।
प्रदर्शन के दौरान बंटी यादव, आलोक यादव (पार्षद), सत्यम मिश्रा सहित कई सपा कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अस्पताल चालू नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं, पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन अस्पताल शुरू न होने को लेकर गुस्सा साफ तौर पर देखा गया।